अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
बिजली निगम की ओर से इस बार गांव कानोंदा, कुलासी, खैरपुर और लडरावन में रीडिंग से अधिक एवं लाल रंग के बिल भेजे गए हैं। डिफाल्टर की पुष्टि करने वाले इन लाल बिलों के कारण ग्रामीण बेहद परेशान हैं। ग्रामीणों ने बिजली निगम के अधिकारियों से बिलों में सुधार की मांग की है। इन लाल बिलों को देखकर उक्त गांवों के 2600 कनेक्शन धारकों के पांव तले से जमीन खिसक गई। चूंकि लाल रंग के बिल डिफाल्टर धारकों के यहां भेजे जाते हैं, इसलिए यह सोच कर ग्रामीण भी बेहद परेशान है। लाल रंग और रीडिंग से अधिक बिल आने के कारण उपभोक्ताओं में रोष पनप गया। गांव कुलासी में तो लोग गांव की बड़ी चौपाल में एकत्र हुए। यहां अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रखी और बिलों को कम कराने तथा भविष्य में पुन: ऐसी गलती न होने की मांग रखी। वहां मौजूद अधिकारियों के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए।
लाल बिल आने से महसूस हो रही शर्मिंदगी
गांव कुलासी वासी अजीत ने कहा कि उनके गांव में पिछली बार भी डबल बिल आया था, तब तो कहने-सुनने के बाद आधा बिल भर दिया था। लेकिन अबकी बार बिल ज्यादा आने के साथ-साथ लाल रंग आया है। हालांकि इस बार भी 992 रुपये से आधा करके बिल तो 492 रुपये कर दिया गया। लेकिन लाल बिलों के कारण बेहद शर्मिंदगी महसूस हुई है।
मास्टर सतबीर ने कहा कि जो लोग चोरी करते हैं उन पर कार्रवाई नहीं होती और जो लोग नियमित भुगतान करते हैं, उनके पास बिल ज्यादा भेजे जा रहे हैं। जब अधिकारियों से बात करते हैं तो वो कहते हैं कि सिक्योरिटी ली जा रही है। उन्होंने कहा कि वो सिक्योरिटी देने के लिए भी तैयार हैं। लेकिन सीधे 500 रुपये की बजाय 50-50 रुपये हर बिल में जोड़ें जाए तो ज्यादा परेशानी नहीं होगी।
महावीर ने कहा कि बिल कंपनी की कमी हो या बिजली निगम की, लाल बिल भेजने से चारों गांवों के छवि पर बुरा असर पड़ा है। चारों गांवों के सभी लोग कैसे डिफाल्टर हो सकते हैं। निगम ने तो चारों गांवों को चोर बना दिया है। निगम को इस तरफ गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
ऐसे आई दिक्कत
एक बिजली अधिकारी की मानें तो बिल बनाने वाली डोएक कंपनी की वजह से यह समस्या हुई है। दरअसल, बिजली उपभोक्ताओं से मीटर की सिक्योरिटी ली जानी थी। इसके तहत पिछली बार जब बिल भेजे गए तो सिक्योरिटी बिल में जोड़ कर भेज दी। लेकिन बाद में यह योजना बंद कर दी गई तो लोगों से केवल रीडिंग के हिसाब से आया आधा बिल ही लिया गया। इसके बाद निगम की ओर से बिल बनाने वाली कंपनी को भविष्य में सिक्योरिटी राशि जोड़ने की हिदायत दी थी। लेकिन पिछले बिलों की आधी राशि शेष रह जाने के कारण आपरेटर की गलती से इन उपभोक्ताओं को डिफालटरों वाली सूची में डाल दिया गया और इनके पास लाल रंग के बिल पहुंच गए। हालांकि एक बार फिर निगम ने उपभोक्ताओं से आधा ही बिल वसूला है।
इसलिए भेजा जाता है लाल बिल
उपभोक्ता के द्वारा एक बिल न भरे जाने के बाद उसे चेतावनी देने के लिए लाल रंग का बिल भेजा जाता है। यानी बिजली निगम उक्त उपभोक्ता को डिफाल्टर घोषित कर देता है। इसके बाद भी यदि उपभोक्ता बिल नहीं भरता है तो निगम की ओर से कनेक्शन काट दिया जाता है।
अधिकारी बोले
ग्रामीण क्षेत्र के एसडीई अनिल शर्मा ने कहा कि बिल बनाने वाली एजेंसी के आपरेटर की गलती की वजह से यह हुआ है। ग्रामीणों को इस बारे में बता दिया गया है। रीडिंग के हिसाब से जो बिल आया है, वहीं लिया जा रहा है। सिक्योरिटी नहीं ली जा रही। जिन उपभोक्ताओं ने बिल नहीं भरा है, वे निश्चिंत होकर रीडिंग के हिसाब से अपना बिल भर सकते हैं।