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प्रशासन, खाप और सांगवान ने पंचायत ने पदक विजेता बेटियों को किया सम्मानित

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प्रशासन और फौगाट खाप ने पदक विजेता बेटियों को किया सम्मानित
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चरखी दादरी। आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली बेटियों को चरखी दादरी पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। बाबा स्वामी दयाल धाम पर फौगाट खाप ने कार्यक्रम आयोजित कर गोल्ड मेडलिस्ट विनेश फौगाट व मनु भाकर सहित सिल्वर मेडलिस्ट बबीता फौगाट को सम्मानित किया। इस दौरान खाप पदाधिकारियों ने द्रोणाचार्य अवार्डी महावीर फौगाट व मनु के माता-पिता रामकिशन व सुमेधा भाकर को भी सम्मानित किया।
मंगलवार करीब दोपहर करीब साढ़े 12 बजे विनेश व बबीता फौगाट पहलवान महावीर फौगाट सहित बाबा स्वामी दयाल धाम पहुंची। यहां खाप प्रधान रामदास फौगाट, उप-प्रधान बोबी फौगाट, सचिन बलवंत नंबरदार, प्रवक्ता रामसिंह बलकरा, शमशेर खातीवास, कानूनी सलाहकार गिरेंद्र फौगाट सहित नप वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण सहित विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के दिग्गजों ने उनका स्वागत किया। करीब 20 मिनट बाद गोल्ड मेडलिस्ट शूटर मनु भाकर भी माता-पिता के साथ कार्यक्रम में पहुंची। यहां पहले फौगाट खाप की तरफ से बबीता, विनेश व मनु सहित बॉक्सर नीरज कुमार के अभिभावकों ने बाबा स्वामी दयाल धाम की फोटो व शॉल भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद उपायुक्त अजय सिंह तोमर व पुलिस अधीक्षक हिमांशु गर्ग ने इन सभी लोगों को सम्मानित किया। जिला प्रशासन की तरफ से बॉक्सर नीरज कुमारी के चाचा संजय कुमार को भी सम्मानित किया गया।
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इस मौके पर पहलवान महावीर फौगाट ने कहा कि बेटियों की सफलता पर उन्हें ही नहीं पूरे क्षेत्र व देश को नाज है और इससे वो गदगद हैं। महावीर ने बताया कि वो बबीता का आस्ट्रेलिया में टिकट न मिलने से मैच नहीं देख पाए। उन्होंने कहा कि एक आस्ट्रेलियन पहलवान ने मदद की तो ही उन्हें मैच का टिकट मिल पाया जबकि दल प्रमुखों ने उनकी कोई मदद नहीं की। कार्यक्रम में रामसिंह बलकरा, धर्मवीर खतीवास, नरेश द्वारका, राजेश सांगवान, नितिन जांघू, बलजीत फौगाट, गिरेंद्र फौगाट, जिला खेल अधिकारी सतपाल ढांडा व शमशेर फौगाट, लीला समसपुर आदि बेटियों की कामयाबी को गौरवपूर्ण बताया।

धाम पर पहुंचकर पहले टेका मत्था
बबीता व विनेश फौगाट बहनों ने बाबा स्वामी दयाल धाम पर पहुंचकर पहले मत्था टेका। इसके बाद मंदिर परिसर की परिक्रमा पूरी की कर सम्मान समारोह में शिरकत करने पहुंची।

मुझसे हुई चूक वरना सिल्वर की जगह गोल्ड मिलता : बबीता
कॉमनवेल्थ गेम में कुश्ती के 53 किग्रा भार में सिल्वर मेडल हासिल करने वाली बबीता को गोल्ड न जीतने का मलाल भी है। बबीता का कहना है कि कॉमनवेल्थ में स्वर्ण पदक के लिए ही उसने तैयारियां की थी और इसके अनुरूप ही उसने चारों अपनी बाउट लड़ी। फाइनल मैच में कनाडा की पहलवान से बाउट के दौरान चूक हो गई और नतीजन सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा। बबीता ने कहा कि फाइनल मैच में वो प्रतिद्वंद्वी पहलवान पर अटैक सही ढंग से नहीं कर पाई और इसका फायदा उठाकर उसने मुकाबला जीत लिया। मेरी गलती के कारण ही स्वर्ण की जगह रजत पदक देश को मिला। बबीता ने कहा कि उससे नीचे दर्जे के खिलाड़ियों को तो डीएसपपी नियुक्ति किया जा चुका है लेकिन 2010 में मिली नियुक्ति के सात साल बाद भी वह एसआई ही है। अगर सरकार समय पर प्रमोशन देती तो वो भी कब की डीएसपी बन चुकी होती।

प्रतिद्वंद्वी की कमजोरी को बनाया अपनी ताकत : विनेश
गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में कुश्ती के 50 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली विनेश फौगाट का कहना है कि डेढ़ साल घर से दूरी बनाकर अब गोल्ड मेडल जीतकर लौटने में खुशी मिल रही है। विनेश ने कहा कि जो चोट रियो ओलंपिक में लगी थी वो वास्तव में बहुत गहरी है। यह घाव अगले ओलंपिक में मेडल जीतकर ही भरेगा। विनेश ने बताया कि डबल लैग अटैक उसका सबसे सटीक दांव रहा। विनेश ने बताया कि यह प्रतिद्वंद्वी की कमजोरी भी थी और उसने इसे ही अपनी ताकत बना लिया। विनेश ने बताया कि अपने एग्रेसिव खेल की बदौलत ही वो स्वर्ण पदक जीतने में कामयाब रही। विनेश ने कहा कि इस समय वो रेलवे में कार्यरत है, इसके बावजूद हरियाणा से जुड़ा होना उसकी सबसे बड़ी पहचान है। इस पहचान को वो कभी नहीं छोड़ना चाहेगी। वह हरियाणा में नौकरी करने की इच्छुक है, बशर्ते सरकार उसे मौका दे।
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एकाग्रता के साथ लगाया टारगेट पर निशाना : मनु भाकर
10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली मूलरूप से झज्जर निवासी मनु भाकर ने कॉमनवेल्थ की सफलता को लेकर कहा कि उसने गोल्ड मेडल जीतने के लिए कुछ खास नहीं किया, बस एकाग्रता के साथ टारगेट पर निशाना साधा और सफलता हासिल कर ली। मनु ने कहा कि शूटिंग इतना टफ गेम नहीं है जीतना समझा जाता है। इसके लिए एकाग्रता की सबसे अधिक जरूरत है।
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