फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बादली तहसील में कानूनगो व तहसीलदार हुए आमने-सामने

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

बादली(झज्जर)।
अपनी स्थापना के बाद से ही विवादों में रही जिले की बादली तहसील में आए दिन नया विवाद आमने आ रहा है। बुधवार को विवाद के चलते तहसीलदार को पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस के आने से तहसील में एक नया अध्याय और जुड़ गया है। यह विवाद तहसीलदार व कानूनगो के बीच है। जिसमें कानूनगो की लेट-लतीफी पर जब तहसीलदार ने संज्ञान लेकर उसे हाजिरी रजिस्टर में आने का समय भरने की बात कही तो कानूनगो बिफर गए और उन्होंने न सिर्फ इस मामले में तहसीलदार को खूब खरी-खोटी सुनाई। बल्कि दुर्व्यवहार भी किया। बाद में जब अपने साथ हुए अशोभनीय व्यवहार की शिकायत तहसीलदार ने संबंधित पुलिस चौकी में की तो पुलिस ने भी शिकायत को हाथों-हाथ लिया और कानूनगो को उनके कार्यालय से ही हिरासत में लेने पहुंच गई, लेकिन इस बात का जब जिले के राजस्व विभाग के पटवारियों को पता लगा तो वे अपनी कलम छोड़कर कानूनगो के समर्थन में आ खड़े हुए और अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी। जैसे ही मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आया तो डीआरओ को मामले को सुलझाने के लिए मौके पर भेजा गया। जोकि बुधवार देर शाम तक हाई प्रोफाइल ड्रामा बन गया और दोनों के मध्य कोई समझौता नहीं हो सका।
ये था मामला
जिला उपायुक्त सोनल गोयल ने जिले के संबंधित विभागों के मुखियाओं को अपने कर्मचारियों की समय पर हाजिरी सुनिश्चित करने के आदेश दे रखे है। यही आदेश बुधवार को बादली के तहसीलदार कंवल सिंह पर भारी पड़ गए। हुआ यूं कि उनके यहां कार्यरत कानूनगो गजे सिंह बुधवार को समय की बजाय कुछ देरी से अपने कार्यालय से पहुंचे थे। इस पर संज्ञान लेते हुए जब तहसीलदार ने कानूनगो गजे सिंह को हाजिरी रजिस्टर में अपने आने का समय भरने के लिए कहा तो यह बात कानूनगो गजे सिंह को नागवार गुजरी और उन्होंने आनन-फानन में तहसीलदार के आदेशों पर बिफरना शुरू कर दिया। आरोप है कि कानूनगो ने तहसीलदार के साथ न सिर्फ बदतमीजी की। बल्कि उनके साथ अशोभनीय व्यवहार भी किया। इससे नाराज होकर तहसीलदार ने तुरंत मामले की शिकायत बादली पुलिस चौकी में दे दी। पुलिस ने भी शिकायत मिलते ही अपनी कार्रवाई शुरू कर दी और पुलिसकर्मी कानूनगो को हिरासत में लेने के लिए उनके कार्यालय पहुंच गई।
विज्ञापन

समझौता कराने में जुटे रहे डीआरओ
मामले की सूचना जब जिला प्रशासन को मिली तो डीआरओ नरवीर सांगवान को बादली तहसील में मामले को सुलझाने के लिए भेज दिया गया। समाचार लिखे जाने तक डीआरओ महोदय मामले की गंभीरता को देखते हुए पटवारियों से अपनी हड़ताल खत्म करने व मामले को रफा-दफा करने का प्रयास करते रहे। लेकिन दोनों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई।
सुर्खियों में रहती है बादली तहसील
बादली तहसील शुरूआत से ही सुर्खियों में रहती आई है। जिले की सबसे छोटी और नई तहसील होने के बाद भी यहां नए-नए मामले उजागर होते आ रहे हैं। लेटलतीफी को लेकर आए दिन अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच झगड़ा होता रहता है। तहसीलदार की रजिस्ट्री करने की शक्ति जिला प्रशासन द्वारा वापस ली गई है। नायब तहसीलदार पर भी रजिस्ट्री के नाम पर कई बार लेन-देन के मामले सामने आए हैं। जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की ओर से तहसील में रजिस्ट्री सहित अन्य कामों में हो रहे भ्रष्टाचार पर गंभीरता नहीं दिखाई गई तो लोगों का रोष भी सामने आ सकता है। पिछले दिनों में गुभाना गांव में बिना एनओसी के प्रतिबंधित जमीन की रजिस्ट्री करने का मामला सामने आया तो पूरी तहसील कार्यालय में चर्चा का विषय बन गया।
विज्ञापन


कर्मचारियों को दे चुके हैं नोटिस : एसडीएम
एसडीएम त्रिलोकचंद्र का कहना है कि बुधवार को वह छुट्टी पर थे और उनके संज्ञान में कर्मचारियों के देरी से आने की शिकायतें भी हैं। वीरवार को मामले में अधिकारिक तौर पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने पहले भी कर्मचारियों को लेट-लतीफी आदत में सुधार करने के लिए नोटिस दिए थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें