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विकार त्यागने का पर्व है शिवरात्रि: उर्मिला

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अमर उजाला ब्यूरो
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चरखी दादरी। शिवरात्रि बुराइयों को परमात्मा पर अर्पित करने का पर्व है। इस दिन सच्चे मन से एक विकार अवश्य छोड़ने का संकल्प धारण करना चाहिए। यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा के तत्वावधान में आयोजित आध्यात्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘चली शिव की बारात’ में माउंट आबू से पधारीं राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उर्मिला ने व्यक्त किए।
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उन्होंने कहा कि रात्रि वास्तव में अज्ञान, तमोगुण और पापाचार की निशानी है। कलियुग के समय को रात्रि कहा जाता है। कलियुग के अंत में जब सभी मनुष्य विषय विकारों से ग्रस्त और दुखी होते हैं। अज्ञान निद्रा में सोए पड़े रहते हैं, ऐसे समय में पतित पावन शिव का इस सृष्टि में दिव्य अवतरण होता है। इस परमात्मा शिव के जन्मदिन को शिवरात्रि कहा जाता है। ब्रह्माकुमारी ने कहा कि कलियुग के अंत में मनुष्य को अज्ञान अंधकार से जगाने और सहज राजयोग की शिक्षा देने पर काया प्रवेश करते हैं। नव दुनिया की स्थापना के लिए ब्रह्मा को अपना सारथी बनाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रजापिता ब्रह्मा के द्वारा परमपिता परमात्मा शिव ऐसा दिव्य ज्ञान देते हैं जिससे ऐसी दुनिया की स्थापना हो जिसमें प्रकृति और पुरुष सब कुछ अनुशासित हो। कार्यक्रम का शुभारंभ बाढड़ा विधायक सुखविंद्र मांढी, पूर्व विधायक कर्नल रघवीर छिल्लर, ब्रह्माकुमारी उर्मिला, ब्रह्माकुमारी वसुधा, राजेंद्र यादव, नरेश गोयल ने दीप प्रज्वलन कर किया। सुखविंद्र मांढी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा दी जाने वाली शिक्षा से अज्ञानता रूपी अंधकार दूर होता है। उन्होंने महाशिवरात्रि पर्व की बधाई देकर कहा कि इस पर्व पर हम स्वयं को आध्यात्मिक मूल्यों से सुसज्जित कर समाज को एकता के सूत्र में बांधने का संकल्प लें तभी हमारा यह पर्व मनाना सार्थक होगा। कार्यक्रम में सावित्री कन्या महाविद्यालय बलौदा के बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी का मनमोह लिया।
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