अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
टीबी को लेकर स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी भले ही लाख दावे करें, लेकिन जिले में इस समय टीबी जांच तक की सुविधा नहीं है। झज्जर जिले के मरीजों को 55 किलोमीटर दूर रेवाड़ी जाना पड़ता है। यहां से रिपोर्ट आने में ही तीन-चार दिन लग जाते हैं। मरीज को पहले जिला अस्पताल में आना होता है, यहां से चिकित्सक टेस्ट लिखते हैं, उसी दिन मरीज रेवाड़ी नहीं पहुंच सकता। इसके चलते मरीज को अगले दिन रेवाड़ी जाना पड़ता है, और तीन दिन बाद रिपोर्ट लेने फिर जाना पड़ता है। ऐसे में जिले के दूर-दूराज वाले गांवों के मरीजों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। इसी सब के बीच मरीजों की जेब भी काफी भार पड़ रही है। जबकि लाखों रुपये की लागत से खरीदी गई झज्जर अस्पताल में मौजूद मशीन मात्र दो घंटे में ही टेस्ट रिपोर्ट देती है। टीबी मरीजों के अलावा इसी मशीन से 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के बलगम की जांच भी की जाती है, लेकिन बीमार बच्चों के बलगम की भी जांच एलटी न होने के कारण नहीं हो पा रही है।
सामान्य अस्पताल में 20 लाख की लागत वाली बलगम जांच की मशीन तो हैै, लेकिन सारी समस्या एलटी नहीं होने के कारण पैदा हो रही है। सामान्य अस्पताल की हर लैब का यही हाल है। सामान्य अस्पताल में ब्लड बैंक व लैब को चलाने के लिए करीब 10 एलटी की आवश्यकता है, लेकिन इस समय केवल दो एलटी के सहारे ही काम चलाया जा रहा है, जिसके चलते हर विभाग की जांच रिपोर्ट प्रभावित रहती हैं। जांच रिपोर्ट लेट होने पर मरीजों के तीमारदारों द्वारा एलटी के साथ झगड़ा किया जाता है।
टीबी की टीके लगाने भी बंद
झज्जर जिला मुख्यालय स्थित राजकीय नागरिक अस्पताल में टीबी के टीके पिछले सवा महीने से नहीं लग पाने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल के रूम दो में टीबी के मरीजों को भी टीके लगाए जा रहे थे, लेकिन अब काफी समय से अस्पताल में टीके लगाने बंद कर दिए गए हैं। टीकाकरण न होने के कारण टीबी की गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
वर्जन
बलगम जांच के लिए एलटी की व्यवस्था की जाएगी। फील्ड के एलटी से इस प्रकार की एडजस्टमेंट की जाएगी कि ग्रामीण क्षेत्र का भी सुचारु चलता रहे और जिला लेवल पर भी मरीजों को दिक्कत न आए। टीबी के टीके नहीं लगने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इसका वे पता करवाएंगे और कारणों की जांच की जाएगी। मरीजों को जिला अस्पताल में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी।
- डॉ. रमेश धनखड़, सीएमओ, झज्जर।
- सरकारी अस्पताल में नहीं लैब टेक्नीशियन
- 20 लाख की मशीन फांक रही धूल, रेवाड़ी से आती है तीन दिन बाद रिपोर्ट
- विभिन्न विभागों में 10 एलटी की आवश्यकता, दो के सहारे चला रहे काम