अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। शहर में पिछले एक सप्ताह से सीवर बैक मा रहा है। इस कारण सभी मैनहोल गंदगी से लबालब भरे पड़े हैं। कहीं-कहीं तो ओवरफ्लो होकर बाजारों और गलियों में गंदगी बह रही है। सभी सीवर लाइनें जाम पड़ी हैं। निकासी नहीं होने से हालात बिगड़े हुए हैं। सीवरेज ट्रीटमेेंट प्लांट के बनने के बाद से सफाई न होने से अब इस स्टोरेज टैंक की क्षमता भी कम हो गई है। यह इस समय ओवरफ्लो हो रहा है। पार्षदों ने प्रशासन और विभाग से शहर की सीवरेज समस्या का स्थायी समाधान करवाए जाने की मांग की है।
दिल्ली बाईपास स्थित इस प्लांट के पानी को समायोजित करने का प्लान गत वर्ष तैयार किया गया था। अब तक इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिल सकी है। यह एसटीपी करीब नौ एकड़ जमीन पर बना है। इस प्रोजेक्ट के मंजूर होने पर ही शहर की सीवरेज समस्या का स्थायी समाधान संभव है। शहर के दोनो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के दूषित पानी का प्रबंधन न होने और सीवर लाइनों के ब्लाक होने की वजह से बार- बार सीवर की समस्या पैदा हो रही है। थोड़ी सी बारिश होने पर सीवर की मेन पाइप लाइनों से दबाव नहीं बन पाता है।
शहर से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित दादरी-दिल्ली बाईपास के समीप व गांव रामनगर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। इन प्लांटों में शहर का दूषित पानी जाता है। जिस समय यह ट्रीटमेंट बने थे उस समय इन क्षेत्रों में किसानों को इस पानी की सिंचाई के रूप में जरूरत थी लोग इस ट्रीट पानी से सिंचाई कर लेते थे लेकिन अब यह एरिया धीरे-धीरे आबाद होने लगा है। आसपास मकान व दुकानें भी बनने लगी हैं। खेतों में भी अब चव्वे की समस्या पैदा हो गई है। ऐसे में किसान अब इस सीवरेज के ट्रीट पानी से सिंचाई भी नहीं कर रहे हैं। इसे पानी का इस्तेमाल न होने की वजह से इसके समायोजन व प्रबंधन की समस्या बीचबीच में सीवरेज संबंधी परेशानी पैदा कर रही है। अब पिछले एक सप्ताह से शहर की सीवरेज व्यवस्था ओवरफ्लो ठप पड़ी है। अब इस प्लांट के आसपास बस्ती होने की वजह से दूषित पानी से 24 घंटे दुर्गंध बनी रहती है। दिल्ली प्रमुख मार्ग होने पर बसों व अन्य वाहनों में सवार लोगों को काफी दूरी तक दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ने लगा है।
विभाग ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए पिछले साल एक प्रपोजल तैयार किया था। इसके तहत इस सीवरेज पानी को ड्रेन नंबर आठ में डाले जाने की प्लान तैयार की गई। इसके लिए विभाग ने करीब 25 किलोमीटर की लंबाई में लोहे की लाइन बिछाए जाने की प्लानिंग की थी ताकि इस फालतू पानी को ड्रेन नंबर आठ में डाला जा सके। जनस्वास्थ्य विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए 28 करोड़ का एस्टिमेट तैयार किया था लेकिन इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिली थी। इस प्रोजेक्ट को यह तर्क देते हुए रिजेक्ट कर दिया गया था कि जिले में कोई ड्रेन बनाई जाएगी उस ड्रेन में इस पानी का समायोजन हो जाएगा लेकिन किसानों के विरोध के चलते यह ड्रेन प्रोजेक्ट भी रिजेक्ट हो गया। अब तो तो यहां हालात बेहद खराब बने हुए हैं। दिल्ली रोड स्थित समसपुर के समीप बना यह एसटीपी किसानों व शहरवासियों के लिए परेशानी पैदा कर रहा हैं। एसअीपी के समीप बना स्टोरेज पौंड इस समय ओवरफ्लो बना हुआ है। इससे शहर की सीवरेज व्यवस्था ठप पड़ी है।
ब्लॉक लाइनें बनी हैं गले की फांस
इस समय शहर में तकरीबन सीवरेज मैनहोल बैक मार रहे हैं। ब्लॉक लाइनें दूषित पानी और कचरे से अटी पड़ी हैं। दूषित पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। ब्लॉकेज होने की वजह से अब स्थिति यह है कि सीवरेज का पानी एसटीपी तक नहीं पहुंच पा रहा है। सीवरेज ओवरफ्लो होने से आम लोगों व दुकानदारों को भी परेशानी हो रही है। कई भागों में तो मकानों में भी सीवरेज बैक मारने पर दूषित पानी बाथरूम के जरिए अंदर घुस जाता है। ब्लाकेज खोलने के लिए जैट मशीन की जरूरत है। कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ यह मशीन उपलब्ध करवाए जाने की हामी भरी थी लेकिन आज तक मशीन नहीं पहुंची है।
1 सीवरेज की वजह से कई दिनों से सीवरेज ओवरफ्लो हो रहा तीन-चार बार जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर चुके मगर इस ओर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। - प्रदीप गुप्ता ।
सीवरेज व्यवस्था बिल्कुल ठप्प हो चुकी है जिससे शहर में सीवरेज ओवरफ्लो हो रहा है। दूषित पानी दुकानों के सामने जमा हो जाता जिससे आमजन का यहां से गुजरना कठिन हो गया है। - उमेश कुमार ।
सड़क पर जमा दूषित पानी से सड़क में गड्ढे हो रहे हैं। इससे यहां से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों को परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। - कृष्ण ।
हमारे मकान के सामने सीवर ओवरफ्लो से दूषित पानी जमा हो जाता है। दूषित पानी में मच्छर पनपने लगे हैं। इससे बीमारियों के फैलने का डर बना हुआ
है। बलवान सिंह ।
फिलहाल सीवरेज लाइन रुकी हुई है। इस वजह से पानी की आगे निकासी नहीं हो पा रही है। इसे जल्द ही ठीक करवाया जाएगा। - जेई लोकेश कुमार, जनस्वास्थ्य विभाग