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बच्चों को ब्लू व्हेल से दूर रखने के लिए स्कूलों में विशेष ध्यान

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहादुरगढ़।
बच्चों और किशोरों के लिए जानलेवा साबित हो रहे ब्लू व्हेल गेम के प्रसार से स्कूल संचालक व अध्यापक भी चिंंतित हैं। इस गेम के दुष्परिणामों की वजह से कई स्कूलों में अध्यापक विद्यार्थियों को समझाते भी हैं। स्कूलों में बच्चों के मोबाइल फोन लाने पर पहले ही अमूमन रोक रहती है। लेकिन इस नए संकट की आशंका से अधिकतर स्कूलों में फोन के इस्तेमाल को सख्ती से रोका जा रहा है। अमर उजाला ने कई स्कूल संचालकों/प्रमुखों और अध्यापकों से इस सिलसिले में बातचीत की तो उन्होंने अपने सुझाव इस प्रकार दिए।

समझाती हैं प्रशिक्षु अध्यापिकाएं
ब्लू व्हेल गेम की वजह से हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं ने हमें हिला कर रख दिया है। कालेज की छात्राएं खासकर प्रशिक्षु अध्यापिकाएं किशोरों को और किशोरों के अभिभावकों इस तरह के गेम से दूर रहने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। इसलिए हम अपने कालेज की बीएड छात्राओं को इसके लिए बता रहे हैं। कालेज की प्रशिक्षु अध्यापिकाएं प्रेक्टिकल के दौरान भी स्कूलों में बच्चों को समझाएंगी।
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- डॉ. आशा शर्मा, प्राचार्य, वैश्य बीएड कालेज

स्कूल में मोबाइल रखने पर रोक
अभिभावकों की अनदेखी की वजह से कई बच्चे स्कूल में भी मोबाइल फोन ले आते हैं। इस तरह की स्थिति खास तौर से सातवीं से बारहवीं कक्षा तक के बच्चों में देखी जाती है। लेकिन हम अपने स्कूल में ऐसे संदिग्ध बच्चों पर कड़ी नजर रखते हैं और मोबाइल फोन जब्त करके संबंधित अभिभावक को बुलाया जाता है। ब्लू व्हेल गेम का मामला सामने आने के बाद इस पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
- जितेंद्र लाठर, निदेशक बीएसएम स्कूल।

समझाते हैं बच्चों को
आज के हाइटेक युग में बच्चों को मोबाइल फोन से पूरी तरह दूर रखना तो संभव नहीं है। अगर दुरुपयोग न हो तो इसके कुछ लाभ भी हैं। मगर इस बात की आशंका रहती है कि बच्चे सदुपयोग के बजाय दुरुपयोग जल्द पकड़ते हैं। जब से ब्लू व्हेल का संकट आया है तब से चिंता ज्यादा बढ़ गई है। इसलिए हम अपने स्कूल में बच्चों को मोबाइल फोन नहीं रखने देते। बच्चों को ब्लू व्हेल से बचने के लिए समझाया जा रहा है।
- संगीता वर्मा, प्रशासिका त्रिवेणी स्कूल।

बच्चों को रखते हैं व्यस्त
ब्लू व्हेल गेम को विध्वंसक प्रवृति के व्यक्ति ने बनाया। अब कुछ विध्वंसक प्रवृति के लोग इस गेम का लिंक सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों से बच्चों तक पहुंचा देते हैं। जो बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है। बच्चों तक लिंक न पहुंचने देने के लिए हम अपने स्कूल में बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखने की कोशिश करते हैं। मोबाइल फोन और इस गेम से दूर रखने के लिए बच्चों को दूसरे रोचक खेलों में व्यस्त रखा जाता है।
- राकेश कोच, प्रबंध निदेशक माडर्न स्कूल।

अभिभावकों को सर्कुलर जारी कर बताए हैं गेम के खतरे
ब्लू व्हेल जैसे गेम के प्रति बच्चों के साथ-साथ वे खुद भी उनके अभिभावकों को भी जागरूक कर रहे हैं। इसके लिए सर्कुलर भी जारी किए गए हैं। सर्कुलर जारी कर अभिभावकों को ब्लू व्हेल जैसे गेम के खतरे बताए गए हैं। साथ ही बच्चों को ऐसे गेम से दूर रखने के साथ उन पर खास ध्यान देने के लिए भी कहा गया है। स्कूल में बच्चों के मोबाइल लाने पर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है।
- प्रदीप सांगवान, एसडीएम पब्लिक स्कूल, प्रबंध निदेशक।

बच्चों को अच्छे कार्यों में व्यस्त रखना जरूरी
स्कूल में बच्चों के मोबाइल फोन लाने पर रोक रहती है। मगर ब्लू व्हेल के बवाल की वजह से शिक्षकों को बच्चों पर नजर रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। अध्यापक द्वारा भी बच्चों को इसके खतरे के प्रति समझाया जाता है। अभिभावकों को भी कहा जा रहा है कि वे बच्चों को मोबाइल से दूर रखें। बच्चों का दिमाग पढ़ाई और दूसरे रचनात्मक कार्यों में लगाए रखना ब्लू व्हेल जैसे गलत गेम से दूर रखने का सबसे अच्छा तरीका है। इसलिए हम बच्चों को पढ़ाई के अलावा मैदान में जाकर खो-खो, बैडमिंटन व टेबल टेनिस खेलने और टीवी पर ज्ञान बढ़ाने वाले मनोरंजक कार्यक्रम देखने को कहते हैं।
- वीएन झा, प्राचार्य एसआर सेंचुरी स्कूल।

प्रार्थना सभा में करते हैं जागरूक
वैसे तो बच्चों को मोबाइल फोन देना ही गलत बात है। स्कूल में सुबह की प्रार्थना सभा में बच्चों को यह गेम न खेलने के लिए बताया जाता है। अभिभावकों को पीटीएम के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। उनके स्कूल में मोबाइल पर पूरी तरह पाबंदी है। अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल न दिए जाने की सलाह दी जा रही है। यदि बच्चे मोबाइल लेते हैं तो अभिभावक उसकी देखरेख अवश्य करें कि बच्चा मोबाइल फोन में क्या कर रहा है।
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- राजपाल खत्री, जय भारत हाई स्कूल, निदेशक

बच्चों के हाथों पर निशान जांचे अभिभावक
अभिभावकों को ब्लू व्हेल गेम को लेकर लगातार जागरूक किया जा रहा है। उन्हें बताया गया है कि ऐसा गेम बच्चों के लिए कितना खतरनाक है। स्कूल में शिक्षक भी बच्चों को ब्लू व्हेल जैसे गेम खेलने से होने वाले खतरों को बता रहे हैं। साथ ही अभिभावकों को भी निर्देश दिया गया है कि वह अपने-अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए उनके हाथों पर निशान की नियमित जांच करें।
- सतीश शर्मा, शिक्षाविद
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