झज्जर। जिले में धान की फसल की बुआई इस साल करीब एक लाख 50000 एकड़ में की गई है। फसल पक चुकी है और कटाई जारी है, लेकिन इस दौरान धान की फसल में भूरा तेला कीट लग गए हैं। लगभग 10 प्रतिशत फसल भूरा तेला की चपेट में आ गई है। फसल पीली होकर पूरी तरह से सूख रही है। इससे किसानों को इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
छारा गांव निवासी धर्मेंद्र, जयपाल, राकेश, अमित आदि ने बताया कि इस समय धान की कटाई का काम जारी है और कटाई के समय ही फसल में भूरा तेला कीट लग गए हैं। कीट धान के पौधे के तने से रस चूस लेता है, जिस कारण फसल पीली पड़ने लगती है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो जिले में अभी तक 10 प्रतिशत फसल इसकी चपेट में है। इसका सबसे ज्यादा असर बहादुरगढ़ और बादली में देखने को मिल रहा है, जहां पर 15 से 20 प्रतिशत फसल इसकी चपेट में है।
कहा कि किसानों को समय-समय पर खेतों में निगरानी करते रहना चाहिए। यह बीमारी आसपास की धान की फसलों को भी खराब कर सकती है। अगर खेत में बीमारी दिखे तो कीटनाशक का प्रयोग करना चाहिए। यह बीमारी उन जगहों पर जल्दी फैलती है, जहां पर फसल अच्छी है और खेतों में पानी खड़ा हो।
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कीट के फैलने का कारण
इस कीट बीमारी के फैलने का सबसे बड़ा कारण मौसम में बदलाव होना है। रात में मौसम ठंडा हो रहा है, जिससे नमी बढ़ रही है। साथ ही धान के खेत में खड़ा हुआ पानी भी इसकी वजह बन सकता है। आजकल किसान फसलों में ज्यादा यूरिया का प्रयोग कर रहे हैं, जो इस बीमारियों की वजह भी बन रहा है।
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कैसे करें बचाव...
धान के खेत में अगर पानी खड़ा है तो उसे निकाल दें। खेत में जाकर निगरानी करनी चाहिए। अगर धान के पौधे पर भूरा तेला के 5 से 10 कीट मिलते है तो किसानों को डाईनोटिस्यूरॉन 20 प्रतिशत एसजी 80 ग्राम का प्रयोग करना चाहिए या फिर 120 ग्राम पाइमट्रोजिन चेस डब्ल्यूपी का प्रयोग 200 लीटर पानी में करना चाहिए। इसके साथ अन्य कीटनाशक दवाइयों का प्रयाेग नहीं करना चाहिए।
वर्जन
किसानों को खेतों में खड़ा हुआ पानी निकाल देना चाहिए। किसानों को खेतों में फसल की लगातार निगरानी करनी चाहिए, ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके। अगर भूरा तेला मिलता है तो कीटनाशक का प्रयोग करना चाहिए।-जितेंद्र अहलावत, उप निदेशक कृषि कल्याण विभाग, झज्जर