बबीता चौधरी ने बताया कि लघु सचिवालय परिसर में सखी सेंटर बनाया गया है। यहां पर पीड़िता 5 दिन तक रह सकती है। इन 5 दिनों के अंदर पीड़िता की काउंसिलिंग और मेडिकल जांच करवाई जाती है। लीगल वकील के जरिये कानूनी सलाह दी जाती है और इन 5 दिनों में पीड़िता के कहे अनुसार पुलिस द्वारा कार्रवाई की जाती है। दोनों पक्षों को बुलाया जाता है। सखी सेंटर का प्रयास रहता है कि महिला का घर दोबारा से बस जाए। अधिकतर केस में घर बसाने में कामयाबी हुए हैं। अगर पीड़िता दोनों पक्षों में किसी के साथ नहीं रहना चाहती तो उसे मोक्ष आश्रम भेज दिया जाता है।
कई बार महिलाओं को ससुरालियों द्वारा घर से निकाल दिया जाता है या दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता है। इसके अलावा परिजनों से नाराज होकर किशोरी या युवती भी घर छोड़कर चली जाती हैं। ऐसे में उनके साथ आपराधिक घटना होने की आशंका रहती है। महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने में यह व्यवस्था बेहतर साबित होगी।
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