हरियाणा रोडवेज वर्कर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने सोमवार को करीब पांच बजे चक्का जाम कर दिया। प्रदेश सरकार की ओर से परिवहन की नई पॉलिसी के विरोध में रोडवेज यूनियन ने बसें बंद कर वर्कशॉप में खड़ी कर दी। बिना अल्टीमेटम शुरू हुई इस हड़ताल से हजारों यात्रियों को दिक्कतें सहनी पड़ी।
जींद में प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए परमिट कैंसल कराने की मांग को लेकर वहां पिछले दो दिन से चक्का जाम है। जींद डिपो की कोई बस नहीं चल रही थी। इस मुद्दे को लेकर सोमवार को रोडवेज की सभी यूनियनों की बैठक हुई, जिसमें सरकार को कुछ घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि बसों के परमिट रद्द नहीं किए तो सोमवार रात 12 बजे से हड़ताल पर चले जाएंगे। इस बीच रोडवेज कर्मचारियों ने शाम करीब साढे़ चार बजे ही बस बंद कर दी। रोडवेज की बसों को वर्कशॉप में खड़ा कर हड़ताल शुरू कर दी। इसके बाद यूनियन के सदस्यों ने प्रदर्शन करते हुए प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया। हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद रोडवेज जीएम ने हड़ताल खत्म करने का अनुरोध किया। जिस पर यूनियन सदस्यों ने कहा कि जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होंगी, तब तक बसें नहीं चलाएंगे। शाम पांच बजे के बाद एक भी बस हिसार बस अड्डे से बाहर नहीं निकली।
रोडवेज यूनियन को बातचीत के लिए चंडीगढ़ बुलाया गया है। हम मंगलवार की दोपहर को जाएंगे। जब तक मांग पूरी नहीं होगी, तब तक चक्का जाम रहेगा। सरकार को हमने पहले ही अल्टीमेटम नोटिस भेजा था।
- दलबीर किरमारा, नेता ज्वाइंट एक्शन कमेटी
बिना पॉलिसी के दिए परमिट
यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बिना पॉलिसी यह परमिट जारी किए हैं। हाई कोर्ट ने 1993 से 2013 तक की सभी परिवहन पॉलिसियां रद्द कर दी थीं। बिना नीति के यह परमिट जारी हो रहे हैं। सरकार की ओर से 273 रूट पर परमिट दिए गए हैं।
बस सेवा बंद
हिसार से बस बंद होने के बाद रोहतक, दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, बहादुरगढ़, फतेहाबाद, भिवानी, सिरसा, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, अंबाला, चंडीगढ़, भादरा, जींद सहित अन्य शहरों के लिए बस सेवा बंद हो गई।
निजी बस संचालकों को फायदा
रोडवेज की हड़ताल होने के बाद निजी बस संचालकों को खूब फायदा हुआ। खासतौर पर दिल्ली रूट पर चलने वाली बसों को फायदा मिला। इसके अलावा कुछ प्राइवेट बस संचालकों ने अपनी बस दिल्ली रूट पर चला दी। लोकल रूट पर टैक्सी संचालकों ने जीप और कैब चलाना शुरू कर दिया, जिसमें किराया डेढ़ से दोगुना वसूला गया।
बातचीत होने तक बसें चलने की संभावना नहीं
सरकार से बातचीत होने तक बसें चलने की संभावना नहीं है। ऐसे में यात्री दूसरे विकल्प तलाश लें। दिल्ली जाने के लिए रेलवे एक विकल्प हो सकता है। इसके अलावा कुछ निजी बस भी सेवा उपलब्ध करा रही हैं।