हिसार। तनाव, मानसिक दबाव, भावनात्मक परेशानी और गलत संगत नशे की शुरुआत का कारण बन सकती है। ऐसी स्थिति में नशे का सहारा लेने के बजाय विशेषज्ञ और पारिवारिक सदस्यों से संवाद कर परामर्श लेना चाहिए। यह बात नागरिक अस्पताल की मनोवैज्ञानिक डॉ. शालू ढांडा बूरा ने गुरु गोरखनाथ जी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शनिवार को अमर उजाला की ओर से नशे की लत विषय पर आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में छात्राओं को संबोधित करते हुए कही।
डॉ. शालू ने कहा कि नशे की लत केवल स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करत बल्कि परिवार, रिश्तों, आत्मसम्मान और भविष्य पर भी प्रतिकूल असर डालती है। महिलाओं और युवतियों में नशे की समस्या रोकने के लिए जागरूकता के साथ परिवार और समाज का सहयोग भी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि नशे की शुरुआत कई बार छोटी आदत के रूप में होती है जो धीरे-धीरे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने लगती है। इससे आत्मविश्वास और आत्मसम्मान प्रभावित होने के साथ पारिवारिक रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने छात्राओं से स्वतंत्रता और अधिकारों का सकारात्मक एवं रचनात्मक उपयोग करने तथा स्वास्थ्य, सम्मान और भविष्य को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने और नशे के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया। उन्हें बताया गया कि नशे से बचाव के लिए स्वयं जागरूक होने के साथ आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए 14416 और 14446 हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।
अंत में छात्राओं ने स्वयं नशा न करने और दूसरों को भी इस बुराई से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। इस दौरान डॉ. नेहा बिश्नोई, डॉ. कमलेश, डॉ. निर्मल कौशिक, डॉ. कुमारी सरोज, डॉ. सीतू राणा, डॉ. स्नेह लता,डॉ. आशा लता व भाग्यश्री मौजूद रहीं।
नशे की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति का दें साथ :
डॉ. शालू ने कहा कि यदि परिवार में कोई व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहा है तो परिजनों को उसका सहयोग करना चाहिए। उसे ताने देने या समस्या को छिपाने के बजाय उपचार और परामर्श की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। परिवार का सहयोग और सकारात्मक माहौल नशे की आदत से बाहर निकलने की प्रक्रिया में मददगार हो सकता है।