इस सीजन में शुक्रवार को दूसरी बार सबसे गहरी धुंध पड़ी। इस दौरान हाईवे पर शून्य तो शहर में दृश्यता 40-50 मीटर ही रही। यही नहीं दोपहर 12 बजे तक धुंध छाई रही। इसके बाद धूप निकली तो धुंध से राहत मिली। इस दौरान दिन व रात का तापमान भी सामान्य से कम रहा। अधिकतम तापमान सामान्य से चार तो न्यूनतम तापमान सामान्य से दो डिग्री कम रहा। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मदन खीचड़ ने बताया कि 18 जनवरी तक मौसम परिवर्तनशील रहेगा। इस दौरान कहीं-कहीं बादल या गरज-चमक व हवाओं के साथ बूंदाबांदी या हल्की बारिश की संभावना है।
शुक्रवार सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले तो गहरी धुंध छाई हुई थी। स्थिति यह थी कि 50 मीटर से दूरी से आगे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। हाईवे पर तो हालात और भी गंभीर थे। वहां दृश्यता शून्य थी। इस वजह से वाहन सड़कों पर रेंग-रेंग कर चल रहे थे। यही नहीं दिन के समय भी वाहन चालकों को वाहनों की लाइन ऑन रखनी पड़ी। दोपहर 12 बजे लोगों को इस धुंध से राहत नहीं मिली। करीब सवा 12 बजे धूप निकली तो मौसम साफ हुआ, जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। धूप निकलने से लोगों को धुंध के साथ-साथ ठंड से भी राहत मिली।
दिन के तापमान में हुई बढ़ोतरी
वीरवार के मुकाबले शुक्रवार को दिन के तापमान में दो डिग्री से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई, इसके बावजूद यह सामान्य से कम रहा। हालांकि रात के तापमान में 0.4 डिग्री की गिरावट आई और यह भी सामान्य से कम रहा। सुबह साढ़े आठ बजे वातावरण में नमी की मात्रा 100 प्रतिशत रही, जो शाम साढ़े पांच बजे घटकर 84 प्रतिशत रह गई।
ऐसे बनती है धुंध
सर्दी के मौसम में पृथ्वी की ऊपरी सतह के तापमान कम होने पर हवा में उपस्थित जलवाष्प संतृप्त होने पर संघनित होकर जल की सूक्ष्म बूंदों में परिवर्तित हो जाते हैं। ये सूक्ष्म बूंदे वायुमंडल में उपस्थित धूल मिट्टी व प्रदूषक तत्व जो न्यूक्लिआई के रूप में संघनन करने में सहायक होते है, उनसे मिलकर दृश्यता को कम कर देते हैं और आसपास की ठंडी हवा के संपर्क में आने पर इनका स्वरूप धुएं के बादल जैसा बन जाता है। वायुमंडल में अधिक नमी होने पर यह घने कोहरे का रूप ले लेता है और इस स्थिति में दृश्यता एक किलोमीटर से भी काफी कम हो जाती है। धुंध व बादल बनने की प्रक्रिया एक जैसी होती है यदि धरती के नजदीक यह हो तो धुंध और अधिक ऊंचाई पर बने तो बादल कहा जाता है।