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Hisar News: आर्यनगर के तीन स्कूलों में चार फीट तक जलभराव

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आर्य नगर के सरकारी स्कूल हॉस्पिटल रोड पर भरा बरसात का पानी।
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हिसार। भादरा-बालसमंद रोड स्थित आर्यनगर में करीब 10 दिन से जलभराव की स्थिति है। इस कारण वहां की 49 ढाणियां खाली कराई जा चुकी हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का संचालन धर्मशाला परिसर में किया जा रहा है जबकि पशु अस्पताल बंद है। आपस में सटे आर्यनगर के तीन स्कूलों में चार फीट तक जलभराव हुआ है।
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स्कूल परिसर के कमरों में भी पानी पहुंचा है। इन तीनों स्कूलों में छात्र संख्या करीब 900 और शिक्षकों समेत कर्मचारियों की संख्या 80 से अधिक है। वहां तैनात लोगों ने कमरों से पानी निकालने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
आर्यनगर के ग्रामीणों ने बताया कि गांव के खेत और तालाब सभी जलमग्न हैं। इसी कारण ओवरफ्लो हो रहा पानी सड़कों और आबादी में पहुंच रहा है। आलम यह है कि कई जगह पानी की सबसे निचली और सबसे ऊपरी सतह पर काई जम चुकी है। इस कारण वहां फिसलन हो रही है।
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खेल मैदान डूबने के कारण खिलाड़ी भी परेशान हैं। आर्यनगर से गंगवा गांव की सड़क पर वाहनों का संचालन ठप है। कई जगह अधिक जलभराव होने पर ग्रामीणों को फोरलेन का डिवाइडर तक तोड़ना पड़ा है। वहां पानी निकासी के लिए लगी मोटरों से पानी की निकासी लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) बीएंडआर के अभियंताओं की निगरानी में की जा रही है। गांव में स्थित बिजली घर परिसर में आ रहे पानी को हटाने के लिए दिन-रात दो-दो मोटर चलानी पड़ रही हैं।
शहर से भादरा-बालसमंद मार्ग पर कई जगह सड़कों पर मिट्टी डालकर पानी का बहाव बदला गया है। कई जगह फोरलेन सड़क पर एक रास्ता बंद करके वाहनों का वन-वे संचालन किया जा रहा है। इस कारण एक वाहन से उछल रहा पानी दूसरे वाहन में पहुंच रहा है। आर्यनगर के पास हिंदवान की फिरनी के पास की बस्ती भी जलमग्न है।
पटवारखाने में भी जलभराव का खतरा
लोगों की निजी और सार्वजनिक संपत्ति की क्षति की रिपोर्ट बना रहे आर्यनगर के पटवारी बलवीर भी आपदा से नहीं बच सके हैं। पीछे स्थित तालाब और सामने स्थित सड़क से आया पानी उनके पटवारखाने में भी पहुंचने लगा। इस कारण उन्होंने अपने कार्यालय के दरवाजे पर सीमेंट, ईंट और कंक्रीट से एक फीट ऊंची और चार इंच मोटी सुरक्षा दीवार बना दी है। उनके पास टोकस, रावलवास, नथवाना और न्योली कलां गांव की भी जिम्मेदारी है।
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