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तीन हैंडपैंप के सहारे दस हजार की आबादी

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जलघर में अपने खर्चे से पानी पहुंचाने का प्रयास करते ग्रामीण। - फोटो : Hisar
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बेशक आज पूरी दुनिया संयुक्त राष्ट्र के आह्वान पर विश्व जल दिवस मनाकर पानी की महत्ता के प्रति नागरिकों को जागरूक करने का काम करेगी लेकिन जिले का कुलाना एक ऐसा गांव है जहां के लोगों को प्रत्येक दिन पानी का इंतजार करना पड़ता है। यहां पेयजल व सिंचाई के पानी की समस्या कोई एक दो महीने पहले की नहीं है बल्कि 21 वर्षों से गांव के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। बड़ी बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्र का सबसे बड़ा जलघर कुलाना गांव में ही बना हुआ है। दो दशक पहले तक आसपास के 9 गांवों की प्यास बुझाने वाला कुलाना गांव आज बूंद बूंद पानी के लिए भी जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों व सरकार के नुमाइंदों की ओर देख रहा है। बिना सिंचाई के गांव के किसानों की उम्मीद भी हर बार दम तोड़ जाती है। 10 हजार की आबादी वाले कुलाना गांव को अपनी प्यास बुझाने के लिए गांव के जलघर में लगे 3 हैंडपंपों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
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सबसे ज्यादा महिलाओं को हो रही परेशानी : जैसे ही गर्मी नजदीक आती है यह तीनों हैंडपंप भी पानी छोड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर ग्रामीणों को खुद अपनी जेब ढीली कर टैंकरों के माध्यम से पानी मंगवाना पड़ता है। इसके अलावा मजबूरी के कारण साथ लगते खरड़ अलीपुर गांव में स्थित एक आरओ प्लांट से भी पानी खरीदना पड़ता है, लेकिन सभी व्यक्ति खरीद कर पानी भी नहीं पी सकते। पानी की इसी समस्या के कारण महिलाओं को हर मौसम में सिर पर टोकनी व मटके रखकर 2 किलोमीटर दूर तक पानी लेने के लिए जाना पड़ता है।
खुद पैसे खर्च कर जल घर में पहुंचा रहे पानी : वर्तमान में पूर्व सरपंच मेवा सिंह ने खुद पैसे खर्च करके जागरूक ग्रामीणों के सहयोग से भाटला माइनर से किसानों के खेतों के हिस्से का पानी जेसीबी के माध्यम से अपने खेतों को खोदकर गांव के जल घर में पानी भरने की कोशिश कर रहे हैं। पूर्व सरपंच मेवा सिंह व ग्रामीणों ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों सहित जिले के उच्च अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह तक पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण गांव के जल घर को ताला जड़ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।
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4 दिन में 10 मिनट के लिए आती है सप्लाई : पूर्व ब्लॉक समिति मेंबर डॉ. संदीप सिंहमार ने बताया कि गांव कुलाना में 80 के दशक से ही बड़ा जलघर बना हुआ है। महज रिकॉर्ड में बीड़ माइनर रजबाहे से पानी जलघर तक आता है लेकिन वास्तव में इस माइनर से जलघर तक पानी पहुंच ही नहीं पाता। गांव के बड़े जलघर में दो बड़े पानी के टैंक बने हुए हैं। जब कभी इनमें पानी होता भी है तो चार दिन में एक बार 10 मिनट के लिए ही वाटर सप्लाई दी जाती है।
गांव में पीने के पानी की भयंकर समस्या बनी हुई है। अधिकारियों को कई बार अवगत करवा चुके हैं मगर हमारी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही। महिलाओं को पीने के पानी लेने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। अगर जल्द समस्या का समाधान नहीं होगा तो मजबूरन हमें बड़ा कदम उठाना पड़ेगा। - मांगेराम, सरपंच, गांव कुलाना।
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