पवन प्रेम सारस्वत
सिवानी मंडी (हिसार)। खुदरा बाजार को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार की तरफ से जारी किए गए दस के सिक्के सिवानी शहर में प्रचलन से बाहर हो गए हैं। बिना किसी अधिकारिक बयान के शहर में छोटे से लेकर बड़े दुकानदारों ने इन सिक्कों को लेना बंद कर दिया है। खास बात यह है कि इसके बावजूद प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
बता दें कि देश में दस के सिक्के वर्ष 2009 में प्रचलन में आए थे। वर्ष 2011 के बाद हर साल नए-नए डिजाइन के 14 प्रकार के सिक्के बाजार में जारी किए गए थे। दस का पिछला सिक्का वर्ष 2017 में जारी किया गया था। मगर देश में नोटबंदी के बाद अब यह सिक्का बिना किसी अधिकारिक पुष्टि के बाजार में प्रचलन से बाहर हो गया है। दुकानदार से लेकर लोग इसके लेनदेन में परहेज करने लगे हैं। शहर में सैकड़ों की संख्या में ऐसे लोग है जिनकी दस रुपये के सिक्कों की जमा पूंजी अब कबाड़ बन गई है। उनके पास वैध सिक्के है, लेकिन वे चाहकर भी इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
दुकानदार बोले- कोई नहीं ले रहा सिक्के
नाम न छापने की शर्त पर दुकानदारों का कहना है कि उनके पास रोजाना ग्राहक दस के सिक्के लेकर पहुंचते हैं, लेकिन वे इसे लेने में परहेज कर रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक उनके पास भी ढेरों की संख्या में दस के सिक्के हैं। मगर बड़े दुकानदार इन्हें लेने से मना करते हैं तो वे भी सिक्के लेने से परहेज कर रहे हैं।
व्यापारी तो दूर बैंक भी नहीं ले रहे सिक्के
शहरवासी शकुंतला, प्रदीप बंसल, सुनील चोपड़ा, दिनेश शर्मा, कपिल तनेजा, राजू महता, सुनील कौशिक, गौरव शर्मा, हेमंत खत्री ने बताया कि उनके पास दस रुपये के ढेरों सिक्के हैं, लेकिन शहर में कोई भी दुकानदार इन सिक्कों को लेने को तैयार नहीं है। इन सिक्कों को उन्होंने बैंक में भी जमा करवाना चाहा, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। (संवाद)
रिजर्व बैंक ने सिक्के बंद नहीं किए हैं
भारतीय रिजर्व बैंक ने दस रुपये के सिक्कों पर किसी भी प्रकार की कोई भी रोक नहीं लगाई है। ये सिक्के पूरी तरह से वैध हैं, जो दुकानदार इन्हें नहीं ले रहे है, उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जिन लोगों को सिक्कों को लेकर दिक्कत आ रही है, वे हमारे बैंक से संपर्क कर सकते है।
-संजय कुमार, शाख प्रबंधक, एसबीआई।
हो सकती है सजा
नियमानुसार सिक्के भी भारतीय मुद्रा हैं। सिक्काकरण अधिनियम 2011 की धारा 6 के तहत रिजर्व बैंक द्वारा जारी सिक्के भुगतान के लिए वैध हैं, बशर्ते कि सिक्के को जाली नहीं बनाया गया हो। सही सिक्कों को लेने से मना करना भारतीय दंड सहिता 489 ई के तहत अपराध है। इसके तहत संबंधित न्यायालय दोषी पाए जाने पर कारावास व आर्थिक दंड अथवा दोनों लगा सकते हैं।
-सुनील पनिहार, अधिवक्ता।