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Sirsa News: वीएलडीए ने मुंह-खुर व गलाघोंटू अभियान का किया बहिष्कार

Sun, 10 May 2026 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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- 11 मई से शुरू होना है गलाघोंटू और मुंह-खुर टीकाकरण अभियान, साढ़े चार लाख पशुओं को लगना है टीका
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ओर सोमवार से मुंह-खुर व गलाघोंटू का टीकाकरण अभियान शुरू किया जाना है। इस अभियान में नियमों की अनदेखी को लेकर वेटरनरी सर्विसेज एसोसिएशन सिरसा की रविवार को आपातकालीन बैठक हुई। निर्णय लिया गया कि टीकाकरण का सभी पशु चिकित्सक पूर्ण रूप से बहिष्कार करेंगे। कोई अभियान के तहत टीकाकरण नहीं करेगा।

बैठक की अध्यक्षता राज्य उपाध्यक्ष विनोद ढाका की। जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में वीएलडीए ने जूम बैठक में भाग लिया। बैठक के दौरान राज्य कार्यकारिणी और सभी जिलों के पदाधिकारियों ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। जिला सिरसा के सभी पशु चिकित्सकों ने निर्णय लिया कि जब तक मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी का पूरी तरह से पालना नहीं होती है तब तक वे टीकाकरण अभियान का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।
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विनोद ढाका ने कहा कि सरकार ने जहां आमजन को जागरूक कर रही है कि वे ओटीपी प्रक्रिया में सतर्कता बरतें और किसी को ओटीपी न दें। वहीं, दूसरी तरफ पशुपालन विभाग टीकाकरण के लिए इन्हें अनिवार्य कर रहा है। इससे फील्ड में तैनात कर्मचारियों और पशुपालकों के बीच अविश्वास पैदा हो रहा है। कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी संकट मंडरा रहा है।
भीषण गर्मी और सुरक्षा का अभाव
ढाका ने कहा कि मई-जून की जानलेवा गर्मी में टीकाकरण करने से पशुओं में हीट स्ट्रेस का खतरा रहता है। वहीं, वैक्सीन की प्रभावशीलता खत्म होने का गंभीर खतरा बना रहता है। विभाग ने टीकाकरण से होने वाली किसी अनहोनी या पशु की मृत्यु की लिखित जिम्मेदारी लेने से भी इन्कार किया है। संसाधनों की कमी
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ढाका ने बताया कि कर्मचारियों के पास डेटा अपलोड के लिए उपयुक्त स्मार्ट डिवाइस और इंटरनेट सुविधा नहीं है। वहीं, दूसरी ओर एसओपी के अनुसार टीकाकरण से पूर्व अनिवार्य डीवॉर्मिंग के लिए भी विभाग ने आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं करवाई हैं। इतना ही नहीं, वीएलडीए का मुख्य कार्य टीकाकरण करना है लेकिन विभाग की ओर से उन्हें डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में उपयोग किया जा रहा है। संगठन की मांग है कि हर टीम के साथ एक अलग डेटा ऑपरेटर दिया जाए और फोटो/ ओटीपी की अनिवार्यता खत्म कर केवल राजकीय अस्पतालों में एंट्री की सुविधा दी जाए।
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