खरड़ अलीपुर के ग्रामीणों ने मंगलवार को संदीप के शव को सड़क पर रख कर नेशनल हाईवे जाम कर दिया। करीब तीन घंटे तक लगे जाम के चलते ट्रैफिक को दूसरे रास्तों से डायवर्ट किया गया।
प्रदर्शनकारी संदीप के हत्यारोपियों की गिरफ्तारी तथा संदीप के परिवार की सुरक्षा की मांग कर रहे थे। पुलिस अधीक्षक सतेंद्र गुप्ता ने मौके पर पहुंच कर ग्रामीणों को आश्वासन दिया जिसके बाद ग्रामीणों ने जाम खोल दिया।
जानकारी के मुताबिक बाइक सवार तीन बदमाशों ने सोमवार देर शाम खरड़ में संदीप की गोली मार कर हत्या कर दी थी। संदीप हत्या के प्रयास के एक मामले में गवाह था।
मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीण तथा संदीप के परिजनों ने शव को गांव ले जाने की बजाए मय्यड़ में नेशनल हाईवे पर रख दिया। इस दौरान काफी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थीं।
मृतक के पिता रणधीर सिंह ने पुलिस पर आरोप लगाया कि अगर डीएसपी ने मामले को गंभीरता से लिया होता तो उनके बेटे की जान नहीं जाती। उन्होंने कहा कि पुलिस को पहले ही सूचना दे दी गई थी कि उनके पुत्र को खतरा है। इसके बाद भी पुलिस की ओर से सुरक्षा प्रदान नहीं की गई।
मौके पर पहुंचे एसपी सतेंद्र सिंह से ग्रामीणों ने कहा कि पीड़ित के परिवार को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाए तथा परिवार के सदस्यों के शस्त्र लाइसेंस बनाए जाएं। इसके अलावा हत्यारों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग भी रखी गई।
एसपी ने उनकी तमाम मांगों को मान लिया जिसके बाद ग्रामीणों ने जाम खोल दिया। बाद में गांव में संदीप का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
राजबीर को भी खतरा
ग्रामीणों ने पुलिस से कहा कि मामले के दूसरे गवाह राजबीर की जान को भी खतरा है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर पुलिस ने अभी भी ठीक से कार्रवाई नहीं की तो गैंगवार शुरू हो सकती है।
राजबीर को भी सुरक्षा उपलब्ध कराया जाना जरूरी है।
तीन महीने में दूसरी बार बरसी गोलियां
करीब तीन महीने में गांव खरड़ में दो बार गोलियां बरसाई जा चुकी हैं। 12 जुलाई को बदमाशों ने दो युवकों को गोली मारी थी।
पुलिस ने सत्यदीप की शिकायत पर कई लोगों के खिलाफ हत्या प्रयास का केस दर्ज किया था। इस केस में संदीप गवाह बनाया गया था।
पुलिस ने रूट डायवर्ट किए
नेशनल हाईवे जाम किए जाने के बाद पुलिस ने हिसार-दिल्ली रूट को डायवर्ट किया। हिसार से दिल्ली की ओर जाने वाले वाहनों को डाबड़ा, लाडवा, रामायण होते हुए नेशनल हाईवे पर निकाला गया।
दिल्ली से हिसार की ओर आने वालों को हांसी से बरवाला के जरिए हिसार की ओर भेजा गया।