आर्य समाज, लाला लाजपत राय चौक के 129वें वार्षिक उत्सव के अंतिम दिन रविवार को यज्ञ किया गया। उत्सव के मुख्य वक्ता के रूप में परोपकारिणी सभा के कार्यकारी प्रधान डॉ. धर्मबीर आर्य ने कहा कि वेद संसार का संविधान हैं।
उसके अनुसार ही हम सब को अपना जीवन जीना चाहिए। वेद के आधार से ईश्वर-जीव-प्रकृति की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि ईश्वर-जीव और प्रकृति सत्य है।
जीव सत चित्त (चेतन) और ईश्वर आनंद स्वरूप है। ईश्वर सृष्टि की उत्पत्ति, पालन व प्रलय कर्ता है तथा सृष्टि उत्पत्ति के समय वेदों का ज्ञान देता है।
संयोजक आनंद मुनि ने बताया कि जीवात्मा को ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना, उपासना करनी चाहिए जोकि वेदों में वर्णित है।
सहारनपुर से आई भजनोपदेशिका संगीता आर्या ने पितृ यज्ञ का महत्व गीतों के माध्यम से समझाया कि माता-पिता की सेवा कर उनकी आज्ञा का पालन एवं उन्हें प्रसन्न रखना चाहिए।
बिजनौर से आए युवा गायक मोहित शास्त्री ने अपने भजनों के माध्यम से शराब एक सामाजिक बुराई है, इसको दूर करने में ही हम सबकी भलाई है का संदेश दिया।
सभा का समापन राष्ट्र रक्षा सम्मेलन के साथ किया गया। उपस्थित सदस्यों व छात्रों ने राष्ट्र रक्षा करने का संकल्प लिया।
इससे पूर्व आर्य समाज के पदाधिकारियों द्वारा परोपकारिणी सभा के कार्यकारी प्रधान डॉ. धर्मबीर आर्य का सार्वजनिक अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर आर्य समाज के प्रधान चौ. बदलूराम आर्य, संरक्षक चौ. हरि सिंह सैनी, गोपीचंद आर्य, नरेंद्र मिगलानी, देवेंद्र सैनी, दलबीर आर्य, स्वामी सवितानंद, स्वामी माधवानंद व आचार्य रामस्वरूप सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।