हिसार। जमीन के इंतकाल (म्यूटेशन) में कथित लापरवाही और कानून की अनदेखी के एक मामले में 72 वर्षीय बुजुर्ग मांगे राम की शिकायत पर न्यायिक दंडाधिकारी जसप्रीत कौर की अदालत ने दो तहसीलदारों सहित पांच आरोपियों को समन जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 1 जून निर्धारित की है।
भिवानी के रूपाणा गांव निवासी मांगे राम ने आरोप लगाया कि उसकी माता की मृत्यु के बाद वैध वसीयत के आधार पर जमीन का इंतकाल दर्ज कराने के लिए कई बार तहसील कार्यालय में आवेदन किया लेकिन संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की। शिकायत में दारा सिंह (पटवारी), सुरेश (पटवारी), श्याम सुंदर (कानूनगो), शालिनी लाठर (तहसीलदार) और रामनिवास साडू (तहसीलदार) को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने जमीन के इंतकाल संबंधी प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की और नियमों की अनदेखी की। मांगेराम के अधिवक्ता ने बताया कि शिकायतकर्ता की माता ने वर्ष 2005 में रजिस्टर्ड वसीयत के माध्यम से अपनी जमीन अपने वारिसों के नाम बराबर हिस्सों में बांट दी थी। इसके बावजूद वर्ष 2024 में उनकी मृत्यु के बाद भी जमीन का इंतकाल दर्ज नहीं किया गया। मांगेराम ने इसके लिए तहसीलदार, उपायुक्त, एसडीएम सहित कई उच्चाधिकारियों को शिकायतें भी दीं लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। यह भी आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने हरियाणा लैंड रिकॉर्ड्स मैनुअल, 2013 और हरियाणा राइट टू सर्विस एक्ट के प्रावधानों की अवहेलना की। नियमों के अनुसार, मृत्यु के बाद वसीयत के आधार पर इंतकाल दर्ज करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।