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Lumpy Skin Disease: लंपी से दो और गाय की मौत, जिले में 300 से ज्यादा पशु ग्रस्त

Sun, 07 Aug 2022 04:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, डबवाली, सिरसा (हरियाणा)

सार

चिकित्सकों का मानना है कि यह एक वायरल बीमारी है, जो एक दूसरे पशुओं में फैलती है लेकिन उपाय कर इस बीमारी से पशुओं को बचाया जा सकता है। क्योंकि इस समय बारिश का मौसम चल रहा है।
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लंपी बीमारी से संबंधित गोशाला प्रबंधकों से बातचीत करते हुए पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर। - फोटो : Sirsa
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विस्तार
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सिरसा जिले में तेजी से फैल रही लंपी यानी स्किन डिजीज के लिए अभी तक कोई विशेष वैक्सीन उपलब्ध नहीं है और अब तक कई पशुओं की मौत हो चुकी है। डबवाली में स्थित गोशाला में 100 से अधिक गाय इस वायरस से संक्रमित हैं। इसमें से 18 गायों की हालत गंभीर है। वहीं दो गाय की मौत हो चुकी है। इसके अलावा कई गांवों में लगभग 300 पशु इस बीमारी से ग्रस्त हो गए हैं और नौ पशुओं की इससे मौत भी हो चुकी है।

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जिले के गांव भादड़ा, गदराना, कुरूंगावाली व देसू मलकाना सहित अन्य गांवों में गत एक सप्ताह में इस बीमारी का प्रकोप ज्यादा देखने को मिला है। जिले की विभिन्न गोशालाओं से भी विभाग के पास पशुओं के संक्रमित होने की सूचना आ रही है। जिसके चलते पशुपालन विभाग भी सतर्क हो गया है।

चिकित्सकों का मानना है कि यह एक वायरल बीमारी है, जो एक दूसरे पशुओं में फैलती है लेकिन उपाय कर इस बीमारी से पशुओं को बचाया जा सकता है। क्योंकि इस समय बारिश का मौसम चल रहा है और पशुओं के बाड़े में कीचड़ तथा पानी जमा होने से बीमारी फैलने का डर अधिक रहता है।
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बीमारी के लक्षण
पशु चिकित्सालय सिरसा के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विद्या सागर बंसल ने बताया कि आजकल लंपी स्किन डिजीज बीमारी के मिलते जुलते लक्षण पशुओं में देखने को मिले हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर यह बीमारी गाय में आती है लेकिन यह बीमारी भैंस में भी आ सकती है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के लक्षण बुखार तेज हो जाना और पूरे शरीर पर फोड़े निकलना है। फोड़े जैसे जैसे बड़े होते हैं वह फूट भी जाते हैं और पशु के मुंह में से लार गिरती रहती है। जब पशु बीमार होगा तो वह खाना भी कम कर देता है। इसका इलाज इसके लक्षणों पर आधारित होता है और जहां तक वैक्सीन का सवाल है तो अभी तक इसके लिए कोई वैक्सीन नहीं आई है। उन्होंने कहा कि पशुपालकों को चाहिए कि पशुओं के आसपास गंदगी न फैलने से साफ सफाई रखें।

झोलाछाप से दूर रहने की हिदायत
गांव खारिया स्थित पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक डॉ. गौरव ने बताया कि यह एक वायरल बीमारी है और पशु पशुओं को मक्खी मच्छर के काटने से फैलता है। उन्होंने कहा कि वह पशुपालकों से अपील करते हैं कि इस तरह का लक्षण कहीं देखने को मिलता है तो तुरंत इसकी सूचना पशु चिकित्सालय में दें ताकि समय रहते पशु का इलाज कर सकें। पशुपालक झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में ना पड़े।

लोग सड़कों पर फेंकने लगे पशुओं के शव
डबवाली के वार्ड नंबर 2 में लंपी स्किन वायरस से ग्रसित एक बेसहारा गाय की मौत हो चुकी है। इस और किसी भी प्रकार की गंभीरता ने दिखाते हुए इसे वहां से उठाकर किसी अन्य जगह पर डाल दिया गया। इससे पहले गांव के बस स्टैंड पर त्वचा रोग से संक्रमित मृत गाय को डाल दिया गया। इससे संक्रमण फैलने का बहुत अधिक खतरा बना हुआ है। शहर स्थित गोशाला के मैनेजर प्रदीप कौशिक ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लंपी स्किन वायरस के कारण गायों में त्वचा रोग पाया गया। जिसके लिए गोशाला प्रबंधन ने अपने स्तर पर उनका उपचार किया गया। उन्होंने आक्रोश जाहिर किया कि इतनी दयनीय स्थिति गायों की हो जाने के बावजूद भी इस और पशुपालन विभाग की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया और न ही चिकित्सक ने गोशाला में आकर इस वायरस के प्रति गंभीरता दिखाई है। वहीं, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विद्यासागर, ने गोशाला में विजिट की और उन्होंने भी गायों में फैले इस त्वचा रोग की जांच की।

डेयरी फार्म या पशु बाड़े में फार्मलीन व सोडियम हाइपोक्लोराइट के घोल का करें छिड़काव
कालांवाली। पशु पालन विभाग कालांवाली के चिकित्सकों ने शहर की गो अस्पताल, श्रीमहादेव नंदीशाला और देसूमलकाना में पशुओं की जांच की और पशु पालकों को बीमारी के कारणों, लक्षणों व रोकथाम के बारे जागरूक किया। वेटेनरी सर्जन डॉ. मनीष ने बताया कि उपमंडल कालांवाली में भी पशु लंपी स्किन बीमारी की चपेट में आना शुरू हो गए है। पीड़ित पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखा जाए तथा प्रयोग होने वाले सामान को भी अलग रखा जाना चाहिए। पशुओं की आवाजाही व खरीद फरोख्त कुछ समय के लिए पूरी तरह बंद कर दी जाए। पशुओं की देखभाल करने वालों को सैनेटाइजर व दस्तानों का इस्तेमाल करना चाहिए। डेयरी फार्म या पशु बाड़े में फार्मलीन एक फीसदी व सोडियम हाइपोक्लोराइट के घोल का छिड़काव जरूरी है। श्री महादेव नंदीशाला में लगभग 650 पशुओं में 15 पशु, नंद बाबा गोसेवा संस्थान के अधीन आने वाले बेसहारा पशु अस्पताल में केवल बीमार व दुर्घटनाग्रस्त लगभग 200 पशुओं में से 10 पशु तथा श्रीकृष्ण गोशाला में करीब 700 में से कुछ पशु लंपी स्किन बीमारी से ग्रस्त पाए गए हैं।

लंपी बीमारी से ग्रस्त गाय । संवाद- फोटो : Sirsa

 

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