ट्रक ऑपरेटर्स की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का असर अब दिखने लगा है। ट्रक ऑपरेटर्स ने शहर में स्थित स्टील की करीब 200 फैक्ट्रियों से दो दिनों में करीब 330 टन माल लोड नहीं किया। इस कारण से फैक्टरी मालिकों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा सब्जी मंडी में भी सिर्फ वही ट्रक सप्लाई पहुंचा रहे हैं, जो बीच रास्ते में हैं। अगर यह हड़ताल आगे भी जारी रही तो सब्जियों का संकट भी हो सकता है।
उधर, ट्रक ऑपरेटर यूनियन के मुताबिक मंगलवार को जिलेभर में एक भी ट्रक लोड नहीं हुआ। उनका कहना है कि अभी तक सिर्फ फैक्ट्रियों से माल लोड नहीं किया जा रहा है। अभी सब्जी, गैस व दवा की सप्लाई जारी है। मगर बुधवार को इस बारे में भी फैसला लिया जाएगा कि यह सप्लाई जारी रखी जाए या नहीं। बता दें कि भाईचारा ऑल इंडिया ट्रक ऑपरेटर वेलफेयर एसोसिएशन ने विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की हुई है। जिले की ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया हुआ है। इस वजह से जिलेभर में करीब दस हजार ट्रक सड़कों पर नहीं चल रहे हैं।
सब्जी मंडी में आते हैं प्रतिदिन 50 ट्रक
शहर की मुख्य सब्जी मंडी में प्रतिदिन 50 ट्रक सब्जी लेकर पहुंचते हैं। हालांकि अभी तक ट्रक सब्जी की सप्लाई लेकर पहुंच रहे हैं। मगर ये सभी वह ट्रक हैं, जो हड़ताल शुरू होने से पहले सप्लाई लेकर चल दिए थे। चूंकि अब हड़ताल जारी है तो अब कोई नया ट्रक सामान लोड कर नहीं चलेगा। आढ़तियों की मानें तो अगर अब वह सब्जियां मंगवाते हैं तो या तो ट्रक मालिक साफ मना कर देगा या फिर ज्यादा किराया लेगा। अगर यह हड़ताल जारी रहती है तो सब्जियों का संकट बढ़ सकता है।
स्टील फैक्ट्रियों से लोड होता है औसतन 160 टन माल
वर्तमान में शहर में करीब 200 स्टील की फैक्ट्रियां हैं। इन फैक्ट्रियों से प्रतिदिन औसतन करीब 160 टन माल लोड होता है, जिसमें कच्चे माल से लेकर तैयार माल शामिल है। यह माल देशभर में जाता है। मगर दो दिन से ट्रक ऑपरेटर्स फैक्ट्रियों से माल नहीं उठा रहे हैं, जिस कारण से फैक्टरी मालिक को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ये हैं प्रमुख मांगें
- एक सितंबर से लागू मोटर व्हीकल एक्ट को तत्काल निरस्त करना।
- आयकर अधिनियम की धारा 44 एई में बढ़ाई गई तीन गुणा अनुमानित आय के फैसले को वापस लेना।
- थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के तहत बढ़ाई गई राशि के फैसले को वापस लेना।
- डीजल के दाम जीएसटी के दायरे में लाकर कम करना।
- बॉर्डर व रोड रास्ते में आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस और लोकल पुलिस प्रशासन द्वारा मचाई जा रही लूट से छुटकारा दिलाना।
- टोल प्लाजा के प्रत्येक प्रदेश का सालाना टोकन फिक्स करना।
- देश के हाईवों पर प्रत्येक 200 किलोमीटर पर व बड़े शहरों के बाहर चालकों के विश्राम गृह व पार्किंग की सुविधाएं उपलब्ध कराना।
- प्रत्येक प्रदेश के प्रत्येक जिले में ड्राइविंग सेंटर खोले खोलना, इनमें ट्रेनिंग देकर उन्हें प्रमाण पत्र व लाइसेंस जारी करना।
- डीजल की गाड़ियों की मियाद 10 से बढ़ाकर 15 साल करना।
- 10 साल के बाद गाड़ी के रिकॉन इंजन बदलकर उसे अगले 10 साल तक चलाने की अनुमति देना।
- गाड़ी लेते समय रोड टैक्स, हाईवे पर चलते समय टोल टैक्स और विभिन्न राज्यों की सीमाओं से गुजरते समय लिए जाने वाले प्रवेश शुल्क बंद कर एक टैक्स लागू करना।
- ट्रक ऑपरेटर्स एवं अन्य छोटे, मध्यम व बड़े ट्रांसपोर्टर्स के संबंध में एक अधिकरण स्थापित करना।
- ओवरलोड पर सख्ती से तत्काल अंकुश लगाया लगाना
अभी सब्जी व गैस की सप्लाई नहीं रोकी गई है। बुधवार को इस पर फैसला लिया जाएगा। जब सरकारी उनकी मांगों को पूरा नहीं करती, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
- कुलदीप बैनीवाल, महासचिव, ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन