हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) ने भाणा गांव में क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन परियोजना के तहत किसानों को सरसों के उत्पादन में बढ़त लाने के लिए प्रशिक्षण दिया। यह शिविर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोधपुर के सहयोग से आयोजित किया गया।
केंद्र के संयोजक डॉ. नरेंद्र कुमार, जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप, डॉ. पंकज और डॉ. युगविंद्र ने बताया कि भारत सरकार तिलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक तकनीक से सरसों की खेती करके कम लागत में अधिक आमदनी कमाने की जानकारी दी। साथ ही फसल में लगने वाले कीट और बीमारियों से बचाव के उपाय भी समझाए।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को आरएच 725, आरएच 1424, आरएच 1706, आरएच 1975, आरएच 30, आरएच 8812, आरएच 406, आरएच 761 और आरएच 749 जैसी सरसों की प्रमुख प्रजातियों की विशेषताओं के बारे में बताया।
डॉ. नरेंद्र ने बताया कि केवीके ने गांव बालावास, भिवानी रोहिल्ला, सदलपुर, चिकनवास, रावलवास और भोडिया को गोद लिया है और इन गांवों के किसानों के लिए भी एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन, पराली न जलाने और स्वच्छ भारत अभियान में योगदान देने की शपथ भी ली।