शहर के तोशाम रोड फोरलेन प्रोजेक्ट की समय सीमा पूरी हो गई है। पिछले वर्ष 20 जून को ही ठेकेदार को वर्क अलॉट किया गया था। टेंडर की शर्तों के अनुसार ठेकेदार को एक साल में इस काम को पूरा करना था। मगर अभी तक प्रोजेक्ट का 30 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है। वन विभाग व बिजली निगम के अड़ियल रवैये के कारण काम काफी लेट हुआ। एक साल बाद तक भी न तो वन विभाग की तरफ से प्रोजेक्ट के आड़े आ रहे पेड़ काटे गए और न ही बिजली निगम की तरफ से बिजली की लाइन शिफ्ट की गई है। दस दिन बाद में जिले में मानसून प्रवेश कर जाएगा, जिससे प्रोजेक्ट में और देरी होने की संभावना है।
बता दें कि नवंबर 2017 में मुख्यमंत्री ने डाबड़ा चौक से डाबड़ा गांव तक इस रोड को फोरलेन बनाए जाने की घोषणा की थी। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले इस प्रोजेक्ट का टेंडर ओपन कर दिया गया था। मगर आचार संहिता लगने और वर्क अप्रूवल न मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया था। चुनाव के बाद ठेकेदार को वर्क शुरू करने की अप्रूवल मिली थी।
इन कारणों से प्रोजेक्ट हुआ लेट
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से मंजूरी मिलने में लगा समय
तोशाम रोड पर सड़क किनारे काफी संख्या में हरे पेड़ हैं, जो इस प्रोजेक्ट के आड़े आ रहे हैं। डाबड़ा चौक से बालसमंद नहर तक ही करीब 400 पेड़ खड़े हैं, जिन्हें काटा जाना है। इतनी बड़ी संख्या में हरे पेड़ काटने से पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की मंजूरी लेनी पड़ी। ठेकेदार को जून में वर्क अलॉट हो गया था, जबकि मंत्रालय की तरफ से पेड़ काटने की अनुमति नवंबर में मिली। पेड़ न कटने के कारण ठेकेदार समय पर काम शुरू नहीं कर सका।
मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद भी वन विभाग ने बरती ढिलाई
नवंबर में मंत्रालय के पेड़ काटने की अनुमति मिलने के बाद भी वन विभाग ने पेड़ काटने का काम काफी धीमी रफ्तार से किया। हालत यह है कि सात माह में भी वन विभाग इन 400 पेड़ों को नहीं काट सका। अभी भी बालसमंद नहर तक करीब 100 पेड़ों को काटना बाकी है।
बिजली निगम का भी रहा अड़ियल रवैया
इस रोड के किनारे काफी संख्या में बिजली के खंभे लगे हैं, जिन्हें शिफ्ट किया जाना है। मगर एक साल तक बिजली निगम इन लाइनों को शिफ्ट नहीं कर सका है। इस कारण से भी काम काफी प्रभावित हुआ।
यह है फिलहाल स्थिति
डाबड़ा चौक से बालसमंद नहर तक वाले हिस्से में अभी तक वाइडनिंग का काम ही पूरा नहीं हुआ है। वाइडनिंग के बाद रोड़ी व तारकोल से इसे मजबूत बनाया जाएगा। उधर, आधार अस्पताल से लेकर डाबड़ा गांव तक के हिस्से की वाइडनिंग का काम अभी 25 प्रतिशत तक बाकी है। पेड़ व खंभों के कारण से काम रुका पड़ा है। डाबड़ा नहर पर पुल का निर्माण भी अभी बाकी है। इस हिस्से के ठेकेदार को पिछले वर्ष अगस्त में वर्क अलॉट किया गया था।
हमने पेड़ काटने व बिजली लाइन शिफ्ट करने को लेकर दोनों विभागों के पास छह माह पहले पैसा जमा कराया था। मगर आज तक न तो वन विभाग ने पेड़ काटे और न ही बिजली निगम ने लाइन शिफ्ट की।
- जय सिंह, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी बीऐंडआर
यह है प्रोजेक्ट
लागत- करीब 25 करोड़ रुपये
लंबाई- करीब 5500 मीटर
बनने के बाद चौड़ाई-14 मीटर
सेंट्रल वर्ज-1.20 मीटर
यह होगा फायदा
तोशाम रोड शहर के व्यस्त मार्गों में से एक है। इस रोड पर काफी संख्या में शिक्षण संस्थान और अस्पताल स्थित हैं। तोशाम व इस रूट के गांवों के लोगों का इस रोड के जरिये ही आवागमन होता है। साथ ही सेक्टर-13, सेक्टर 16-17, साउथ बाईपास जाने के लिए लोग इस रोड का इस्तेमाल करते हैं। प्रतिदिन इस रोड से करीब 10 हजार वाहन गुजरते हैं।
रोड के न बनने से यह हो रही परेशानी
डाबड़ा चौक से डाबड़ा गांव इस रोड पर काफी गड्ढे हो रखे हैं, जिस कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। प्री मानसून भी आ गया है, जिससे हल्की सी बारिश होते ही रोड पर कीचड़ फैल जाता है, जिससे हादसे का खतरा भी बना रहता है। सोमवार सुबह हुई बारिश के बाद रोड के हालात बुरे हो गए।