हिसार। जिले में स्वाइन फ्लू के तीन केस सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण के सदिग्ध रोगियों पर निगरानी बढ़ा दी है। संक्रमित मरीज हांसी, सातरोड और लितानी गांव के रहने वाले हैं। इनमें एक महिला भी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के अस्पतालों में फ्लू कॉर्नर सक्रिय करने के साथ ही संदिग्ध मरीजों की रैंडम सैंपलिंग शुरू कर दी है। विभाग ने ओपीडी में फ्लू जैसे लक्षणों वाले कम से कम पांच फीसदी मरीजों के सैंपल लेने का लक्ष्य रखा है।
राज्य सरकार की एडवाइजरी की अनुपालना में जिला नागरिक अस्पताल, उपमंडल स्तरीय अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में फ्लू कॉर्नर सक्रिय किए जा रहे हैं। बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहने या बंद होने और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों वाले मरीजों की ओपीडी स्तर पर स्क्रीनिंग की जाएगी। गंभीर श्वसन संक्रमण वाले मरीजों की इन्फ्लुएंजा जांच अनिवार्य की गई है।
सभी चिकित्सकों को संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेने के निर्देश
डिप्टी सीएमओ डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सभी चिकित्सकों को ओपीडी में आने वाले संदिग्ध मरीजों की सैंपलिंग के निर्देश दिए हैं। रोजाना आने वाले मरीजों में फ्लू जैसे लक्षण वाले कम से कम पांच फीसदी मरीजों के सैंपल लिए जाएंगे। इससे जिले में संक्रमण की वास्तविक स्थिति का आकलन करने और संक्रमण की चेन पर नजर रखने में मदद मिलेगी। जो लोग संक्रमित मिले हैं, इनकी जांच कुछ दिन पहले की गई थी। रिपोर्ट में एच 1एन 1 वायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई।
ओसेल्टामिविर का बफर स्टॉक रखने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर का पर्याप्त बफर स्टॉक जिला वेयरहाउस और अस्पताल की फार्मेसी में रखने की व्यवस्था की है। स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए एन-95 मास्क, पीपीई किट और वायरल ट्रांसपोर्ट मीडिया वायल भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिले के सभी निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और लैब को आईडीएसपी (इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म) पोर्टल पर फ्लू के मामलों की रोजाना रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. खतरेजा ने बताया कि नागरिक अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा कर इन्हें अलर्ट मोड पर रखा गया है।
संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने से फैलता है वायरस
डॉ. खतरेजा ने बताया कि इन्फ्लुएंजा वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से फैल सकता है। संक्रमित हाथों या दूषित सतहों को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए हाथों की नियमित सफाई और खांसते-छींकते समय मुंह-नाक को ढकना जरूरी है। दूसरे प्रदेश या देश की यात्रा से लौटे लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें तो उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
ये लक्षण दिखें तो रहें सतर्क
स्वाइन फ्लू में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, छींक, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी और दस्त की शिकायत भी हो सकती है। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या दबाव, लगातार चक्कर आना, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या त्वचा और होठों का नीला पड़ना जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत
गर्भवती महिलाएं, पांच साल से कम उम्र के बच्चे, बुजुर्ग और मधुमेह, दमा, हृदय रोग, कैंसर जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों में फ्लू की जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से जल्द संपर्क करना जरूरी है।
संक्रमण से बचने के उपाय
खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को टिश्यू या कोहनी से ढकें।
हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से साफ करें।
बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
फ्लू के लक्षण होने पर घर पर रहें और दूसरों के संपर्क में आने से बचें।
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें और जरूरत होने पर मास्क का इस्तेमाल करें।
कब तुरंत अस्पताल जाएं
सांस लेने में ज्यादा परेशानी, सीने में दर्द, ऑक्सीजन की कमी जैसे लक्षण, बेहोशी, लगातार उल्टी या अत्यधिक कमजोरी महसूस होने पर मरीज को घर पर इलाज कराने के बजाय तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।