सिवानी मंडी। उपमंडल न्यायिक मजिस्ट्रेट धर्मपाल की अदालत ने गर्भाधान पूर्व एवं प्रसवपूर्व निदान तकनीक (भ्रूण लिंग जांच) अधिनियम, 1994 के उल्लंघन के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने सुदाम और अजमेर उर्फ दीपक को अधिनियम की धारा 23(3) और डाॅ. जय प्रकाश उर्फ जेपी गोयल को धारा 23(1) के तहत दोषी ठहराया। तीनों को तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
सहायक जिला न्यायवादी संदीप मांडा एवं अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता सुनील परिहार ने बताया कि इस मामले में 15 जुलाई 2019 को अधिकृत पीएनडीटी टीम ने सिवानी स्थित श्रीकृष्ण प्रणामी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में छापा मारा था। इसी दौरान अवैध लिंग निर्धारण/लिंग चयन से जुड़ा मामला सामने आया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का अवलोकन किया। आरोपी डॉ. श्रीराम सिवाच को उनके खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं होने पर बरी कर दिया गया। संवाद