फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hisar News: पुलिस की ढिलाई से बिगड़ी बात, गंभीरता से नहीं ली धरना कमेटी की चेतावनी

विज्ञापन
विज्ञापन
श्याम ओझा
विज्ञापन

हिसार। जीवन हत्याकांड में शुरुआत से ही पुलिस ने ढिलाई बरती। इससे मुख्य आरोपी रमेश और उसके सहयोगी मोलड़ को बचने का पूरा मौका मिला। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार किया तब अगले दिन रमेश की पत्नी प्रोमिला को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद परिजनों ने जीवन के शव का पोस्टमार्टम करवा लिया लेकिन मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने तक अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। पुलिस की ढिलाई को देखते हुए परिजनों के समर्थन में संगठन उतरने लगे। पहले खाप पंचायतें आईं और फिर किसान व मजदूर संगठन और विपक्षी राजनीतिक दल। एसपी आवास का घेराव किया गया। जिंदल रोड को जाम किया गया। धरनार्थियों ने चेतावनी दी तब जाकर एसपी पहुंचे। उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयासों की जानकारी दी। इस जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर लघु सचिवालय के बाहर पक्का मोर्चा शुरू कर दिया गया। परिजनों को समर्थन मिलने का दौर जारी रहा। दिन पर दिन निकलते गए लेकिन मुख्य आरोपी नहीं पकड़ा गया। 12 अगस्त को महापंचायत बुलाई गई। धरना कमेटी ने साफ चेतावनी दी कि 13 अगस्त की शाम तक आरोपी नहीं पकड़े जाते हैं तो 14 अगस्त को टोल जाम और 15 अगस्त को हांसी में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह में सीएम के ध्वजारोहण कार्यक्रम का विरोध करेंगे। कमेटी सदस्य शमशेर नंबरदार ने चेतावनी दी कि सीएम को तिरंगा नहीं फहराने देंगे, चाहे इसके लिए कोई कुर्बानी देनी पड़े। इसके बावजूद पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। 14 अगस्त को टोल जाम के बाद डीसी ने धरना कमेटी के सदस्यों के साथ एक बार फिर वार्ता की लेकिन कमेटी सदस्य अपनी मांग पर डटे रहे। उन्होंने साफ कह दिया कि आज रात से ही हांसी पहुंचेंगे। उन्होंने टोल जाम में पहुंचे लोगों से भी 15 अगस्त की सुबह हांसी पहुंचने का आह्वान किया।

हिसार-हांसी पुलिस में नहीं दिखा कोई तालमेल

हिसार और हांसी पुलिस को स्पष्ट हो गया था कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में विरोध प्रदर्शन होगा। बावजूद इसके दोनों जिलों की पुलिस के बीच कोई तालमेल नहीं दिखा। न ही हिसार रेंज के आईजी कुलदीप सिंह ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर दोनों जिलों की पुलिस में तालमेल बैठाने का प्रयास किया।
विज्ञापन


कोई खुफिया इनपुट नहीं मिला
पुलिस के पास इस बात का कोई खुफिया इनपुट नहीं था कि 15 अगस्त को हांसी में भारी संख्या में प्रदर्शनकारी इकट्ठा होकर माहौल बिगाड़ सकते हैं। धरना कमेटी सदस्यों ने साफ चेतावनी दी थी। हांसी में जाट धर्मशाला में रुकने और जमा होने तक की जानकारी सार्वजनिक कर दी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने किसी भी प्रमुख किसान व खाप प्रतिनिधि को हिरासत में लेने की जहमत नहीं उठाई। नतीजा यह रहा कि जब प्रदर्शनकारी हांसी पहुंचे तो पर्याप्त जाब्ता ही नहीं था। प्रदर्शनकारियों की संख्या और माहौल बिगड़ता देखकर आनन-फानन में अतिरिक्त पुलिस बल मंगवाया गया।
विज्ञापन


पुलिस रक्षात्मक मोड में रही
पुलिस किसी भी शव का 12 से 24 घंटे में अंतिम संस्कार करवा सकती है लेकिन इस मामले में कोई प्रयास नहीं किया गया। बेशक पुलिस ने जीवन के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए मनाने का प्रयास किया लेकिन किसी भी कदम में सख्ती नहीं दिखी। उपायुक्त महेंद्र पाल का यही कहना था कि वे सामाजिक ताने-बाने, परिजनों की मानसिक स्थिति और मानवीयता का भी ध्यान रख रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें