हिसार। लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत पांच नवंबर को नहाय-खाए से होगी। मुख्य पर्व सात नवंबर को है। इस दिन श्रद्धालु पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे। बालसमंद नहर में पानी नहीं होने से छठ पूजा पर संकट के बादल छा गए हैं। पानी नहीं होने के कारण नहर में बनीं सातों सीढि़यां साफ नजर आ रही हैं। यदि समय रहते नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो श्रद्धालुओं के सामने पूजा-अर्चना करना चुनौती रहेगी। पूर्वांचल जन कल्याण संगठन समिति के पदाधिकारियों व श्रद्धालुओं ने नहर में पानी छोड़ने और सफाई करवाने की मांग उठाई है। बता दें, कि बालसमंद नहर पर भी छठ महापर्व के दिन 500 से ज्यादा श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। सात नवंबर को श्रद्धालु डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे तो वहीं आठ नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ महापर्व का समापन करेंगे। बालसमंद नहर का जायजा लेने पहुंचे छपरा निवासी डॉ. बीके सिंह ने बताया कि नहर में इतने पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य नहीं दे पाएंगे। कम से कम तीन से चार सीढि़यों तक पानी होना चाहिए। हमारी मांग है कि नहर में पानी छोड़ा जाए, ताकि पूजा-अर्चना करने में किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी न हो।
नहर में गंदगी के लगे ढेर
बालसमंद नहर में जहां एक ओर पानी नहीं है, वहीं, गंदगी के ढेर भी लगे हैं। दीये, घड़े, कूड़ा नजर आ रहा है। यहां तक कि सीढि़यों पर भी गंदगी जमा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि संबंधित विभाग की ओर से गंदगी हटवाई जाएं। इस दिन श्रद्धालु नहर पर छठी मैय्या की पूजा-अर्चना करते हैं।
पांच दिन पहले नहर बंद हुई है, अभी नहर में पानी आने में 10 से 12 दिन का समय लग जाएगा। फिर भी छठ महापर्व के दिन नहर में पानी छोड़ने की कोशिश की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना करने में कोई परेशानी न हो। - आनंद श्योराण, एक्सईएन, सिंचाई विभाग