जीजेयू में आयोजित अक्षरम कार्यक्रम में लोक गायिका मालिनी अवस्थी का स्वागत करते कुलपति प्रो. नरस
हिसार। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित लोक-गायिका मालिनी अवस्थी में गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में (जीजेयू में) आयोजित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महाकुंभ अक्षरम्-2026 में शनिवार को खूब रंग जमाया। उन्होंने अपने मधुर स्वरों में ''''''''रंगीला बैरन बिहारी'''''''' और ''''''''रंगी सारी गुलाबी चुनरिया हो'''''''' जैसे लोकप्रिय लोकगीत प्रस्तुत किए तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के दूसरे दिन लोक संस्कृति, संगीत और सिनेमा पर केंद्रित विशेष विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया गया। अवस्थी ने कहा कि हरियाणा के बच्चे अपनी मिट्टी से गहराई से जुड़े हुए हैं। लोक संगीत हमारी संस्कृति की आत्मा है जिसे संरक्षित और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
प्रख्यात फिल्म निर्देशक और चिंतक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सिनेमा के बदलते स्वरूप पर चर्चा की। डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भगवान राम और अयोध्या के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपराएं हमारी पहचान की आधारशिला हैं। लोकगीतों और लोक परंपराओं से जुड़कर अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करें। कार्यक्रम में लोक निर्माण विभाग के मंत्री रणबीर गंगवा ने भी शिरकत कर युवाओं का मार्गदर्शन किया। हरियाणवी लोक गायक बिंदर दनोदा और विनु गौड़ के भक्ति गीत ''''ओ नाथ जी चेला बना ले'''' ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
फैशन परेड पर बजीं तालियां
कार्यक्रम में दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स, रोहतक (डीएलसीसुपवा) के छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। मुख्य ऑडिटोरियम का मंच सुपवा के छात्र-छात्राओं के फैशन शो के दौरान रैंप ऑडिटोरियम में बदलता प्रतीत हुआ। डेढ़ घंटे तक रंग-बिरंगी रोशनी व अलग-अलग म्यूजिक की बीट्स पर सधे हुए कदमों के साथ कैटवॉक की। विद्यार्थियों ने प्रोफेशनल मॉडल की भांति वॉक करते हुए पारंपरिक व आधुनिक भारतीय परिधान पेश किए। इस दौरान सभागार में लगातार तालियां की गड़गड़ाहट गूंजती रही।