हांसी। बदलते प्रवासन की बयार, परिवारों के ऋण-निवेश के बदलते तौर-तरीकों और ग्रामीण कृषक समाज के जमीनी यथार्थ को अपनी परिधि में समेटने के लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने जुलाई से देशव्यापी सर्वेक्षण का शंखनाद किया है। नीति-निर्धारकों को विश्वास है कि इन आंकड़ों के आईने से ही देश के सर्वांगीण विकास का सूरज चमकेगा जिसकी रोशनी में सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए अधिक सशक्त और समावेशी योजनाओं का खाका खींचेगी।
सर्वेक्षण के तहत हांसी क्षेत्र के गांव उमरा को आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण, गांव घिराय को असंगठित सेवा उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण तथा अखिल भारतीय ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण के लिए चयनित किया गया है। प्रवासन सर्वेक्षण के लिए गांव बड़छप्पर और ढाणा का चयन किया गया है। चयनित क्षेत्रों में एनएसओ के अधिकृत अधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार घर-घर जाकर और संबंधित इकाइयों से जानकारी एकत्रित करेंगे।
वरिष्ठ सांख्यिकीय एवं पब्लिसिटी अधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि इस चरण में प्रवासन सर्वेक्षण, अखिल भारतीय ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण तथा स्थिति आकलन सर्वेक्षण शुरू किए गए हैं। इनसे रोजगार, शिक्षा, विवाह जैसे कारणों से होने वाले प्रवासन, परिवारों की संपत्ति व ऋण स्थिति, कृषि आय, किसानों की आजीविका, रोजगार, उपभोक्ता मूल्य और निवेश संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।
जून 2027 तक चलेगा सर्वेक्षण :
यह सर्वेक्षण जून 2027 तक चलेगा। इसका उद्देश्य विश्वसनीय और प्रमाणिक आंकड़े जुटाकर केंद्र एवं राज्य सरकारों को बेहतर योजना निर्माण और जनकल्याणकारी नीतियां तैयार करने में सहयोग प्रदान करना है। एनएसओ वर्ष 1950 से सामाजिक एवं आर्थिक विषयों पर वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर देश की बदलती परिस्थितियों के प्रमाणिक आंकड़े उपलब्ध करा रहा है।