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Hisar News: वीडियो में दिख रही छात्राओं ने कहा सजा नहीं खेल था मुर्गा बनाना, महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया पहुंचीं जगान के सरकारी स्कूल

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जगान के सरकारी स्कूल में जांच के लिए पहुंचीं हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू। 
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हिसार। अग्रोहा के गांव जगान स्थित राजकीय हाई स्कूल में छात्राओं को मुर्गा बनाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। जांच के लिए सोमवार को हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया स्कूल पहुंचीं। उनके सामने वीडियो में दिख रहीं छात्राओं ने इसे सजा नहीं बल्कि खेल बताया। इस मामले में गठित चार सदस्यीय कमेटी 12 मार्च को जांच करेगी।
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भाटिया ने प्राचार्य, शिक्षकों, छात्राओं व उनके अभिभावकों से बातचीत की। वीडियो में मुर्गा बने दिख रहीं 10वीं की छात्राओं ने कहा कि उन्हें सजा के तौर पर मुर्गा नहीं बनाया गया था बल्कि वे खेल खेल रही थीं। इस पर भाटिया ने साफ कहा कि चाहे इसे खेल बताया जाए या सजा, बच्चों को मुर्गा बनाना किसी भी सूरत में सही नहीं है। स्कूलों में बच्चों को न तो इस तरह के खेल खिलाएं और न ही ऐसी सजा दी जानी चाहिए। बच्चों के लिए कई अन्य सकारात्मक गतिविधियां और खेल सुविधाएं हैं। शिक्षकों को उन्हीं पर ध्यान देना चाहिए।
शिक्षिका ने ही बनाया वीडियो

जांच के दौरान सामने आया कि वीडियो स्कूल की ही एक शिक्षिका की ओर से बनाया गया था। महिला आयोग ने संबंधित शिक्षिका को भी पूछताछ के लिए बुलाने की बात कही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई का पता चल सके।
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क्या था मामला



जगान स्कूल का एक वीडियो हाल ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें कुछ छात्राओं को मुर्गा बनाकर स्कूल परिसर में घुमाते दिखाया गया। यह वीडियो 3 या 4 अक्तूबर 2025 का है। इस पर संज्ञान लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने 5 मार्च को चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। कमेटी 12 मार्च को स्कूल पहुंचकर मामले की जांच करेगी।

सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े

स्कूल में निरीक्षण के दौरान सामने आया कि सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हैं। रेनू भाटिया ने गांव के सरपंच को निर्देश दिए कि कैमरे लगाने वाली एजेंसी को पत्र लिखकर जल्द से जल्द कैमरे लगवाए जाएं। उन्होंने कहा कि केवल स्कूल ही नहीं बल्कि गांव की चौपाल, मुख्य रास्तों और मोहल्लों के प्रवेश द्वारों पर भी कैमरे होने चाहिए। सरपंच ने आश्वासन दिया कि 2 से 4 दिनों के भीतर कैमरे फिर से चालू कर दिए जाएंगे। भाटिया ने कहा कि हर स्कूल में प्रशासनिक स्टाफ में समय-समय पर बदलाव होना चाहिए। कम से कम छह महीने या एक साल में जिम्मेदारियों का रोटेशन होना चाहिए ताकि अन्य शिक्षकों को भी मौका मिले और स्कूलों में गुटबाजी की स्थिति पैदा न हो।
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