श्रीविश्वकर्मा धर्मशाला हिसार में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते डॉ. संजय कृष्ण सलिल महाराज। स्रोत : आ
हिसार। श्रीविश्वकर्मा धर्मशाला में श्रीमद्भागवत कथा आयोजित की जा रही है। इसके छठे दिन बुधवार को डॉ. संजय कृष्ण सलिल ने प्रवचन दिए। उन्होंने श्रीकृष्ण-बलराम की शिक्षा, रासलीला का महत्व और रुक्मिणी-श्रीकृष्ण विवाह प्रसंग का वर्णन किया।
डॉ. सलिल ने बताया कि श्रीकृष्ण और बलराम को सांदीपनी आश्रम में शिक्षा के लिए भेजा गया था। वहां उन्होंने धनुर्विद्या में दक्षता प्राप्त कर सुदामा से उनकी भेंट हुई। महाराज ने रासलीला को काम पर विजय प्राप्त करने का प्रतीक बताया जिसे ब्रह्मा, शंकर और राजा परीक्षित ने भी सुना। उन्होंने गोवर्धन लीला का भी उल्लेख किया जहां इंद्र के अहंकार को भंग कर गिरिराज का पूजन किया गया। इसके बाद श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर अपने नाना उग्रसेन को मथुरा का राज सिंहासन सौंपा। कथा में रुक्मिणी और श्रीकृष्ण के विवाह का प्रसंग सुनाया गया।
रुक्मिणी ने शिशुपाल से विवाह तय होने पर श्रीकृष्ण को संदेश भेजा और उनसे विवाह की इच्छा जताई। श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का हरण कर शिशुपाल और रुक्मी से युद्ध किया।
इस दौरान ठाकुर और रुक्मिणी की सुंदर झांकी दिखाई गई। रोहताश जांगड़ा, अनीता जांगड़ा, विकास जांगड़ा कथा के यजमान रहे। इस अवसर पर हरी सिंह बेनीवाल, पवन सिंगला और अजयकांत जांगड़ा समेत कई श्रोताओं ने कथा सुनी।