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मासूमों के सिर से उठा दादा व पिता का साया, दो वक्त की रोटी के लिए गुहार लगा रही मां

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हिसार। कोरोना ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है। किसी ने पिता खोया तो किसी के सिर से मां का साया उठा। ऐसा ही महावीर कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार ने तीन दिन में दो सदस्यों को खो दिया। दादा ताराचंद को शुगर सहित कई बीमारियों ने ऐसा घेरा कि एक मई को उनका देहांत हो गया। अभी इस दर्द से परिवार उबरा नहीं था कि बेटा सुरेंद्र कोरोना की चपेट में आ गया और दो दिन बाद 3 मई को उसकी भी उपचार के दौरान मौत हो गई। अपने परिवार में सुरेंद्र की पत्नी रमा, चार साल का बेटा तनिष्क व एक साल की बेटी दविशा है। रमा ने अपने दोनों मासूमों का पेट भरने के लिए सरकार से नौकरी की गुहार लगा रही है।
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बेटा पेशे से थे वकील, छह साल पहले हुई थी शादी
पत्नी रमा के पिता जींद निवासी सुरेंद्र सैनी ने बताया कि दामाद सुरेंद्र पेशे से वकील थे। करीब दस साल से वे हिसार की कोर्ट में कार्यरत थे। सुरेंद्र सैनी ने बताया कि दिसंबर 2015 में बेटी रमा की शादी हिसार स्थित महावीर कॉलोनी निवासी सुरेंद्र के साथ हुई थी। इनसे दो बच्चे तनिष्क व दविशा हुए। दामाद के पिता ताराचंद को शुगर सहित कई बीमारियां थी, जिस कारण एक मई को उनकी हालत बिगड़ गई और उपचार के दौरान मौत हो गई। उसी शाम को दामाद सुरेंद्र की हालत बिगड़ गई। जांच करवाने पर पता चला कि कोरोना के कारण उनकी प्लेटलेट्स कम हो चुकी है और 3 मई को दामाद की भी मौत हो गई।
पत्नी बोली, बच्चों के पेट पालने के लिए नौकरी दे सरकार
पत्नी रमा ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा तनिष्क एक साल का है, जबकि छोटी बेटी दविशा एक साल की है। ससुर ताराचंद और पति सुरेंद्र की मौत के बाद परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। हालांकि उन्होंने हिंदी विषय में एमए और बीएड उत्तीर्ण की है। सरकार से मांग है कि बच्चों का पेट पालने के लिए सरकार की और से उन्हें आर्थिक मदद व एक नौकरी मुहैया करवानी चाहिए।
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