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Hisar News: ऊंटनी के दूध की मिठास में घुला आरोग्य का अमृत

Sun, 19 Apr 2026 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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डॉ. एके पुनिया
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हिसार। बीकानेर स्थित नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन कैमल (एनआरसीसी) के निदेशक डॉ. एके पूनिया का कहना है कि ऊंटनी का दूध मधुमेह, ऑटिज्म और एलर्जी सहित कई बीमारियों में कारगर सिद्ध हो रहा है। एनआरसीसी में इससे कुल्फी, आइसक्रीम, पेड़ा, लस्सी, फ्लेवर्ड मिल्क, मिल्क पाउडर, घी सहित 25 से अधिक मूल्य-संवर्धित डेयरी उत्पाद तैयार किए जा चुके हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए इन्हें राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में कोल्ड चेन सिस्टम के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा।
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शनिवार को लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय (लुवास) में आयोजित कार्यक्रम में एनआरसीसी निदेशक डॉ. के पूनिया ने कहा कि ऊंटनी के दूध पर संस्थान में व्यापक रिसर्च की गई है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि ऊंट की 9 प्रजातियों में से 5 प्रजातियों पर एनआरसीसी में अध्ययन जारी है। इसमें प्राकृतिक इंसुलिन जैसी प्रोटीन टाइप-1 डायबिटीज मरीजों के लिए शुगर नियंत्रण में सहायक है।
दूध में फैट मात्र 1.5 से 3.5 प्रतिशत तक होती ह, जो गाय-भैंस के दूध की तुलना में कम है। उच्च कोटि के एंटीऑक्सीडेंट्स और प्रोटीन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। वैश्विक शोध के अनुसार, ऑटिज्म ग्रस्त बच्चों और डेयरी एलर्जी से प्रभावित व्यक्तियों के लिए यह दूध प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहा है। बिना पाश्चुरीकृत दूध पीना संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है, इसलिए केवल प्रोसेस्ड दूध का ही उपयोग करना चाहिए।
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बहु उपयोगी बनाएंगे, बाल और हड्डियों का भी सदुपयोग संभव :
डॉ. पूनिया ने कहा कि ऊंट को केवल दूध तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसे बहु उपयोगी बनाने के लिए इको टूरिज्म से जोड़ा जा रहा है। राजस्थान में ऊंट की सवारी लोकप्रिय हो रही है। इसके बाल और हड्डियों का भी सदुपयोग संभव है। ट्रांसपोर्ट के नए साधनों के आने से ऊंट की संख्या में थोड़ी कमी आई है, लेकिन उम्मीद है कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से भविष्य में इस बहु उपयोगी पशु की संख्या में वृद्धि होगी।

दूध नमकीन और कीड़े होने की बात गलत
एनआरसीसी निदेशक ने कहा कि लोगों में एक अवधारणा है कि ऊंटनी का दूध काफी नमकीन होता है। ऐसा कुछ नहीं है। यह दूध भी गाय- भैंस के दूध के समान ही है। लोगों में भ्रांति है कि ऊंटनी का दूध बहुत जल्द खराब हो जाता है। हकीकत यह है कि यह दूध भी दूसरे दूध की तरह से ही उपयोग किया जा सकता है। इसकी सुरक्षित रहने की अवधि भी उनके बराबर है। एक बड़ी भ्रांति यह भी है कि ऊंटनी के दूध में कीड़े होते हैं। यह पूरी तरह से गलत है।
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