भिवानी। गांव बुशान में एक परिवार अपनी बेटी की शादी की खुशियों में डूबा था, लेकिन विधि की विडंबना ने एक दुखद मोड़ लिया। शादी से सात दिन पहले बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया। तीन साल से बीमार चल रहे पिता की बीमारी ने पहले ही परिवार की आर्थिक स्थिति को डगमगा दिया था और अब शादी का सवाल एक और चुनौती बन गया। इस दुखभरे हालात में एक छोटी सी उम्मीद बसी थी, जब जीव जंतु कल्याण सेवा दल के प्रधान मुरारी जांगड़ा ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया।
प्रधान मुरारी जांगड़ा ने बताया कि उनका उद्देश्य समाज में भाईचारे को बढ़ावा देना और जरूरतमंदों की मदद करना है। उन्होंने बताया कि यह 64वीं गरीब कन्या की शादी है, जिसमें उन्होंने मदद पहुंचाई है। उनका मानना है कि असली धर्म इंसानियत की सेवा में है। समाज के सहयोग से इस गरीब कन्या की शादी तय तारीख को संपन्न हो पाई, और यह सब एकजुटता, भाईचारे और मानवता की मिसाल बना।