हांसी। नगर परिषद ने आमटी झील व पार्क के नवीनीकरण के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। यहां पर पंछी विहार बनाया जाएगा। लोगों के लिए झूले, वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था, रिफ्रेशमेंट जोन बनाया जाएगा। साथ ही झील में बोटिंग के लिए दो बोट भी रखी जाएंगी। मंजूरी के लिए प्रस्ताव शहरी स्थानीय निकाय के मुख्यालय में भेजा जाएगा। इसके बाद ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करवाई जाएगी।
आमटी झील के सुंदरीकरण को लेकर नगर परिषद के अधिकारी पिछले तीन महीने से योजना बना रहे थे। बाकायदा आर्किटेक्ट के साथ मिलकर पूरी योजना बनाई गई है। अब जाकर यह प्रस्ताव तैयार हुआ है। इसमें एंट्री गेट के पास वाहनों की पार्किंग की अलग से व्यवस्था होगा। साथ ही झील में दो बोट भी रखी जाएंगी। जिससे आमजन बोटिंग कर सकेंगे। आमटी झील के किनारे स्टील की ग्रिलिंग की जाएगी। साथ ही रंग बिरंगी लाइटें लगाई जाएंगी। इसके अलावा पूरे परिसर में बैठने की व्यवस्था की जाएगी। पूरे परिसर में धोलपुर पत्थर लगाया जाएगा। ताकि पूरा परिसर एक जैसा दिखे। दीवारों पर सुंदर डिजाइन बनाए जाएंगे। पार्क में घाव व पौधे लगाए जाएंगे। वॉकिंग पाथ को भी दुरुस्त किया जाएगा। इसके अलावा झील में कई तरह के सुंदरीकरण के कार्य किए जाएंगे। जिसके माध्यम से यहां पर लोगों का रुझान बढ़ेगा।
पहले भी सुधार के लिए खर्च हो चुके हैं करोड़ों रुपये
ऐतिहासिक आमटी झील को संवारने के लिए स्वर्ण जयंती पार्क योजना के तहत वर्ष 2019 में 2.40 करोड़ रुपये की राशि मिली थी। तब यहां पर झील व पार्क के सुधार के लिए कई तरह के कार्य किए गए थे, लेकिन उस समय यह राशि भी सुधार के लिए कम पड़ गई थी। इससे झील के कई कार्य अधर में अटक गए थे। इसके बाद फिर से बजट की मांग की गई थी, लेकिन इस बजट को स्वीकृति नहीं मिली थी।
2004 में हुआ था जीर्णोद्धार
आमटी झील का जीर्णोद्धार इनेलो के शासन में 2004 में कराया गया था। उस समय हांसी के विधायक सुभाष गोयल स्थानीय निकाय मंत्री भी थे। उन्होंने निजी तौर पर दिलचस्पी लेकर झील को पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित कराया था। शुरुआती सालों में यहां हरियाली, बेंच, लाइटिंग और नौकायन की व्यवस्था ने लोगों को खूब आकर्षित किया था, लेकिन आज वह सारी रौनक गायब हो चुकी है।
आमटी झील का इतिहास
ऐतिहासिक किले के साथ बनी इस झील का इतिहास भी काफी पुराना है। इतिहासकारों के अनुसार आमटी झील पहले एक तालाब के रूप में थी। तालाब के पास एक प्राचीन हनुमान मंदिर भी है। 1038 ई. में यहां पर राजा श्रीपाल का शासन था। तब तुर्क सेना ने यहां हमला किया और राजा श्रीपाल के परिवार को मौत के घाट उतार दिया। राजा की नौजवान बेटी अमृती ने सरोवर में कूदकर अपनी जान दे दी थी। तब से इसे अमृती तालाब कहा जाने लगा। समय बदलता गया और इसे आमटी झील के नामा से जाना जाने लगा।
आमटी झील व पार्क के नवीनीकरण के लिए नगर परिषद ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्दी ही इसे मुख्यालय में भेजी जाएगा। मंजूरी के बाद अगली प्रक्रिया शुरु होगी।- राजेश खोथ, एसडीएम, हांसी।