हिसार। जिन मामलों को जनपरिवाद समिति की बैठक में चुटकियों में निपटाया जा सकता था उनके लिए लोगों को तारीख पर तारीख दी जा रही है लेकिन उनकी तकदीर नहीं बदल रही है।
अब जनपरिवाद समिति में बेहद छोटे-छोटे मामले भी लाकर शिकायतों की संख्या को बढ़ाया जा रहा है। किसी की बुढ़ापा पेंशन नहीं है, किसी को स्कूल में आरटीई के तहत दाखिला नहीं मिला तो कोई कोचिंग संचालक फीस नहीं लौटा रहा। ऐसे परिवाद भी इस बैठक में रखे जा रहे हैं। इन मामलों का समाधान तो हर सप्ताह लगाए जा रहे समाधान शिविर में सामान्य तौर पर हो जाना चाहिए। वहीं जनपरिवाद समिति में कई बड़े मामले वर्षों से लंबित हैं और उनका समाधान नहीं हो पा रहा है।
पिछले 12 साल से जनपरिवाद समिति में आ रहे
मैंने हिसार स्कोलर गृह निर्माण सोसायटी में 2003 में प्लॉट खरीदा था। 2004 में सोसायटी की तत्कालीन प्रधान ने फर्जी प्रस्ताव पास कर कई प्लॉट धारकों के प्लॉट अवैध रूप से अन्य लोगों को बेच दिए। 2015 में सहायक रजिस्ट्रार ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए 15 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए थे लेकिन आज तक यह राशि नहीं मिली। सोसायटी में कई तरह के गबन हुए हैं। हम इस मामले को पिछले 12 साल से जनपरिवाद समिति में उठा रहे हैं। 12 वर्षों में 7 मंत्रियों को अपना दुखड़ा सुना चुके हैं। कई बार हमारी समस्या ग्रीवेंस में लगाई गई, कई बार हटाई गई, लेकिन समाधान आज तक नहीं हो सका।
- प्रेम सिंह, प्रार्थी, हिसार स्कोलर गृह निर्माण सोसायटी, हिसार।
एक साल से जनपरिवाद समिति के चक्कर लगा रहा हूं
मैंने अपनी पुत्रवधू डॉ. दिव्या मोहन के नाम ग्लोबल स्पेस में 22 जुलाई 2020 को बुकिंग कराई थी। कंपनी ने 12 अप्रैल 2021 को अलॉटमेंट लेटर दिया और 15 अप्रैल 2022 को पजेशन लेटर दिया गया। कंपनी ने 21 लाख 11 हजार 828 रुपये की डिमांड की थी जिसके बदले हमने 20 लाख रुपये जमा करा दिए और 1 लाख 11 हजार 828 रुपये का चेक भी दे दिया। इसके बावजूद पिछले चार साल से कंपनी रजिस्ट्री नहीं कर रही है। कंपनी की ओर से कोई सुनवाई न होने पर हमने जनपरिवाद समिति में शिकायत दी। पिछले एक साल से सुनवाई चल रही है, लेकिन हर बार कंपनी की ओर से नए-नए बहाने बनाए जा रहे हैं।
- अविनाश भाटिया, निवासी ग्लोबल स्पेस, हिसार।
डेढ़ साल से समाधान का इंतजार
मैं पिछले डेढ़ साल से जनपरिवाद समिति में शिकायत दे रहा हूं लेकिन अभी तक समाधान नहीं हो रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हर बार नई बात लेकर आते हैं। हमारे गांव के लोगों को पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर जलघर बनाया गया लेकिन उसमें आज तक एक दिन भी पानी नहीं डाला गया। यह मामला विजिलेंस जांच में है। दो गांवों को पानी देने के लिए वाटर वर्क्स में पांच फिल्टर लगे हुए हैं लेकिन केवल एक ही फिल्टर चल रहा है। पिछले पांच साल से फिल्टर नहीं बदला गया है और दोनों गांवों में बिना फिल्टर पानी सप्लाई किया जा रहा है।
- रमेश बैनीवाल, गांव मोहब्बतपुर, हिसार
दो साल से ग्रीवेंस कमेटी में लंबित मामला
गोल्ड सुक प्रोजेक्ट में नकली हस्ताक्षर कर नक्शा बदल दिया गया जबकि हमने किसी प्रकार का सहमति पत्र नहीं दिया था। यह पूरी तरह गलत है। इस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। 2024 से हमने यह मामला ग्रीवेंस कमेटी में लगाया हुआ है जिस पर अब तक सुनवाई चल रही है। मेरे साथ संदीप बैनीवाल, राजकुमार और अश्वनी मेहता भी लगातार इस मामले को उठा रहे हैं।
- प्रदीप सहरावत, प्रार्थी, ग्रीवेंस कमेटी हिसार।