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हिसारः घर पर बच्चा बीमार, रजिस्ट्रेशन के 20 दिन बाद भी नहीं आया मैसेज तो निकल पड़े पैदल

Tue, 19 May 2020 12:04 PM IST
रोहतक ब्यूरो अमर उजाला, हिसार
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घर पैदल जाती बिहारी महिलाएं
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साहब! मेरे परिवार में नौ लोग रहते हैं, जिनमें मेरे माता-पिता, पत्नी, दो साल का बेटा, दो छोटी बहनें और दो भाई हैं। मैं हिसार में मजदूरी करके अपने घर का पालन-पोषण कर रहा था। लॉकडाउन के बाद काम बंद है। घर का गुजरा भी नहीं हो रहा। पैसे के लिए रोजाना फोन आ रहे हैं। बच्चा घर पर बीमार है। इसलिए घर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। रजिस्ट्रेशन करवाए भी 20 दिन से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन कोई मैसेज नहीं आया है। अब मजबूरी में वह पैदल ही घर की तरफ चल पड़ा है।
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यह कहना है बिहार के वैशाली जिले के प्रमोद का। प्रमोद ही अकेला ऐसा व्यक्ति नहीं है, बल्कि जिले से रोजाना सैकड़ों की संख्या में प्रवासी मजदूर पैदल ही अपने घरों की तरफ रवाना हो रहे हैं। इन्हें भूख-प्यास या धूप-छांव की कोई चिंता नहीं है, बस मन में यह बात ठान लिया है कि किसी न किसी तरह अपने घर पहुंचना है। रविवार को अमर उजाला टीम ने शहर से पैदल ही गुजर रहे ऐसे कुछ प्रवासियों से बातचीत कर उनका दुख-दर्द जाना।

दो महीने में लगी मात्र चार दिहाड़ी
झारखंड निवासी अच्छा सतवान ने बताया कि मैं हिसार में मजदूरी करता था। पिछले दो महीने में मात्र तीन-चार दिहाड़ी लगी है। ऐसे में हमारा गुजरा कैसे होगा। खाने तक के पैसे नहीं हैं। अब यहां बैठकर क्या करें, गांव पहुंचने पर कुछ न कुछ कर लेंगे। इसलिए पैदल ही जा रहा हूं। रजिस्ट्रेशन तो करवा रखा है, लेकिन पता नहीं कब तक नंबर आएगा।
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20 दिन पहले करवाया था रजिस्ट्रेशन, नहीं आया कोई मैसेज

बिहार के दरभंगा निवासी पूर्ण और बाबूकांत ने बताया कि हम नरवाना अनाज मंडी में बोरियों की सिलाई करते थे, लेकिन मजदूरी नहीं मिल रही थी। 50-50 रुपये देकर 20 दिन पहले घर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था। मगर अभी तक कोई मैसेज नहीं आया, इसलिए हम पैदल ही नरवाना से निकल पड़े। हमारे पास न तो रहने की व्यवस्था है और न ही खाने की। कोई कुछ दे देता है तो खा लेते हैं, नहीं तो भूखे ही सो जाते हैं।

शेल्टर होम में रुके हुए प्रवासियों की स्थिति
शहर में शेल्टर होम स्पेशल महिलाओं के लिए बस स्टैंड के पास नगर निगम का स्थायी रैन बसेरा आरक्षित किया हुआ है। हालांकि, अभी उसमें एक भी प्रवासी मजदूर नहीं ठहरा है। राधा स्वामी सत्संग भवन, मिर्जापुर रोड में 300 श्रमिक ठहरे हुए हैं। जहाजपुल स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में 130 श्रमिक, जबकि विश्वकर्मा धर्मशाला में 50 श्रमिक ठहरे हुए हैं। वहीं, राजकीय बहुतकनीकी संस्थान में भी व्यवस्था की हुई है, लेकिन वहां कोई श्रमिक नहीं ठहरा। इसके अलावा विदेश से आने वाले लोगों को ठहराने के लिए अग्रसेन भवन में प्रबंध किया गया है, जहां दस लोग ठहराए गए हैं।

जिले में 25 हजार से ज्यादा लोगों ने करवाया रजिस्ट्रेशन
लॉकडाउन के कारण हिसार में फंसे प्रवासी मजदूरों की ओर से अपने घर जाने के लिए जिला प्रशासन के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जारी है। जिला परिषद भवन की ओर से जारी सूची के अनुसार अभी तक जिले में 25 हजार 491 लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है। हिसार से ट्रेनों और बसों के माध्यम से करीब 2500 प्रवासियों को घर भेजा जा चुका है

प्रवासी मजदूरों को वितरित कर रहे भोजन
अग्रोहा विकास ट्रस्ट अग्रोहा धाम की तरफ से प्रवासी मजदूरों व जरूरतमंदों को रविवार को भी भोजन वितरित किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि काम ना होने के कारण अपने घर जाने के लिए भटक रहे हैं। प्रवासी मजदूर पैदल ही घरों की तरफ जा रहे हैं। गर्ग ने प्रवासी मजदूरों से अपील की है कि जो भी मजदूर जहां है, वहीं रुके रहें। सरकार द्वारा प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है।
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