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Hisar News: तीसरी आंख पर उपेक्षा का मोतियाबिंद

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नागोरी गेट मार्केट में लगा हाईक्वालिटी कैमरे की जगह लगा छोटा कैमरा।
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हिसार। शहर के प्रमुख बाजारों में अपराध पर नजर रखने के लिए लगाए गए हाईटेक सीसीटीवी कैमरों की तीसरी आंख पर उपेक्षा का मोतियाबिंद छा गया है। 50 लाख रुपये की लागत से लगाए गए 44 कैमरे महज करीब 24 माह में खराब हो गए। अब इनकी जगह सस्ते कैमरों से निगरानी की जा रही है। कम गुणवत्ता वाली फुटेज के कारण चोरी, लूटपाट और अन्य आपराधिक घटनाओं के बाद आरोपियों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। इससे बाजारों की सुरक्षा व्यवस्था और कारोबारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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करीब तीन साल पहले तत्कालीन राज्यसभा सदस्य डॉ. सुभाष चंद्रा ने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडी) कोष से हिसार के बाजारों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 50 लाख रुपये की ग्रांट जारी की थी। इसका उद्देश्य प्रमुख बाजारों और रास्तों को कैमरों की निगरानी में लाकर आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना था। नगर निगम हिसार की देखरेख में योजना के तहत कैमरे लगाए गए थे।



इन मुख्य मार्केट में लगाए गए थे हाईटेक कैमरे



सांसद कोटे से मिली ग्रांट से शहर के मुख्य बाजारों में हाई क्वालिटी सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना वर्ष 2021 में तैयार की गई थी। योजना के तहत वर्ष 2022-23 में पारिजात चौक से राजगुरु मार्केट, नागोरी गेट मार्केट और अन्य प्रमुख रास्तों को कवर किया गया। कैमरों के जरिए बाजारों में आने-जाने वाले लोगों और वाहनों पर निगरानी रखने के साथ वारदात होने पर आरोपियों की पहचान करने की व्यवस्था की गई थी।
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पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ा था मॉनिटरिंग सिस्टम



हाईटेक कैमरों का मॉनिटरिंग सिस्टम हिसार पुलिस के कंट्रोल रूम से जोड़ा गया था। इससे बाजारों की गतिविधियों पर नजर रखने और आपराधिक घटना के बाद फुटेज खंगालकर आरोपियों तक पहुंचने में पुलिस को मदद मिलती थी। शुरुआत में यह व्यवस्था काफी कारगर रही और कई घटनाओं की जांच में फुटेज महत्वपूर्ण साबित हुई। नियमित रखरखाव और तकनीकी खराबियों को दूर करने की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से धीरे-धीरे कैमरे खराब होते चले गए।



हाईटेक कैमरों की जगह लगाए गए सस्ते कैमरे



खराब हाईटेक कैमरों की जगह अब सस्ते कैमरे लगाए गए हैं। इनकी क्वालिटी और फुटेज को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाई क्वालिटी कैमरों की तुलना में कमजोर कैमरों से रात के समय या दूर से आने वाले व्यक्ति और वाहन की स्पष्ट पहचान करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में सवाल है कि 50 लाख रुपये की निगरानी व्यवस्था महज 24 माह में ही क्यों कमजोर पड़ गई और हाईटेक कैमरों के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी। नियमित देखरेख और तकनीकी मेंटेनेंस होता तो क्या इन्हें इतनी जल्दी बदलने की जरूरत पड़ती?



फुटेज तस्वीर नहीं आती है साफ



बाजारों में चोरी, लूटपाट या अन्य आपराधिक घटना होने पर सीसीटीवी फुटेज पुलिस के लिए अहम साक्ष्य होती है। कैमरे खराब होने या कम गुणवत्ता की फुटेज मिलने से संदिग्धों की पहचान प्रभावित होती है। करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाले बाजारों में निगरानी व्यवस्था कमजोर होने से व्यापारी और आम लोग दोनों चिंतित हैं।

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करोड़ों रुपये के कारोबार वाले बाजारों की सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों के रखरखाव की स्थायी व्यवस्था नहीं बनाई गई। इसी कारण ये खराब हो गए। इनके खराब होने के बाद अब छोटे और सस्ते कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी फुटेज पूरी तरह धुंधली होती है। नागोरी गेट के कैमरों का कंट्रोल रूम इसी मार्केट में था, लेकिन अब इसे राजगुरु मार्केट में कर दिया गया है। इससे परेशानी हो रही है।

- मंगल ढालिया, प्रधान व्यापार एसोसिएशन, नागोरी गेट मार्केट हिसार।

निगम ने राजगुरु मार्केट व अन्य बाजारों में कुल 44 कैमरे लगाए हुए हैं। ये कैमरे अब तक ठीक काम कर रहे थे। इनका रखरखाव निगम टीम समय-समय पर करती रही है। अगर किसी स्थान पर कैमरे खराब हैं तो उनको जल्द ठीक करवाया जाएगा। कुछ जगह कैमरे बदले भी गए हैं।
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- अनूप कुमार, एसडीओ नगर निगम हिसार।
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