हिसार। स्याहड़वा गांव में रविवार सुबह करीब सवा सात बजे मिट्टी खिसकने से कुएं में दबे 52 वर्षीय किसान जयपाल हुड्डा का शव बुधवार दोपहर बाद निकाल लिया गया। कुएं में 55 फुट नीचे जयपाल का शव बरगे यानी लकड़ी की कड़ी पर औंधे मुंह पड़ा मिला। उसकी पीठ पर भारी पत्थर पड़े थे, जिस कारण वह दबा रहा। यह वहीं बरगा है जिस पर पानी की मोटर रखनी थी।
एनडीआरएफ के निरीक्षक कल्लू रावत ने बताया कि मंगलवार रात को कुएं के अंदर जयपाल की शरीर दिखाई दिया था। उनके ऊपर पड़े पत्थर को जब हटा रहे थे तो कुएं की मिट्टी बार बार दरक रही थी। दो बार बचाव कार्य के दौरान टीम के सदस्यों के ऊपर भी मिट्टी गिर गई थी उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। सेना के अधिकारियों के साथ मिलकर शव को बाहर निकालने की एक बार फिर योजना बनाई गई। पहले कुएं के चारों तरफ की मिट्टी को खोदा गया। इसके बाद पूर्व से पश्चिम दोनों तरफ की मिट्टी को पोकलेन गशीन से हटाया गया। कुएं से नीचे तक ही खुुदाई की गई, जहां पर शव फंसा हुआ था। रेस्क्यू टीम ने पौने दो बजे के करीब वहां पर मौजूद ग्रामीणों को 200 मीटर दूर कर दिया। पौने घंटे के बाद रेस्क्यू टीम शव को लेकर नीचे से ऊपर आई। शव को ले जाने के बाद भी ग्रामीणों को कुएं से दूर रखा ताकि फिर से कोई हादसा न हो गए। इसके बाद जेसीबी और पोकलेन की मदद से कुंए को ढकने का काम शुरू किया।
कुएं के अंदर एक तरफ लगाई लोहे की प्लेटें
कुएं की एक तरफ जहां से बार-बार मिट्टी दरक रही थी वहां पर लोहे की प्लेटें लगा दी ताकि जयपाल को निकालते समय मिट्टी न दरके। रेस्क्यू टीम करीब पौने दो बजे नीचे उतरी और सीधे वहां पहुंची जहां पर शव फंसा था। दसके बाद हाथ के जरिये ही मिट्टी को हटाना शुरू किया। करीब ढाई बजे शव को कुएं से निकाल कर कपड़ों में लपेट कर पोकलेन मशीन के जरिये बाहर लेकर आए और एंबुलेंस से अस्पताल ले गए।
जगदीश से 10 फुट नीचे मिला जयपाल का शव
कुएं के अंदर करीब 45 फुट पर सोमवार जगदीश का शव मिला था। उससे 10 फुट नीचे जयपाल का शव मिला है। बार-बार मिट्टी दरकने और शरीर के ऊपर पत्थर पड़े होने के कारण नीचे धंसता चला गया। नीचे ज्यादा गर्मी और उमस होने के कारण शव से बदबू आनी शुरू हो गई थी और शव फूल गया था। हादसे से करीब 80 घंटे बाद जयपाल के शव को निकाला जा सका।
मांग : 50-50 लाख रुपये मुआवजा मिले
किसान नेता दलबीर हुड्डा, मृतक के भाई नरेंद्र हुड्डा, बलजीत नंबरदार, पूर्व सरपंच अश्विनी कुुमार, जसवीर आदि ने कहा कि गांव में जो हुआ वह दुखद हादसा है। इसमें किसान जयपाल और जगदीश की मौत हो गई। दलबीर हुड्डा ने सरकार से मांग की है कि मृतकों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। उनके परिवार के एक एक सदस्य हो नौकरी दी जाए। उन्होंने कहा कि सेना, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन के अलावा ग्रामीणों ने सर्च अभियान में काफी सहयोग किया। सबके सहयोग से दोनों को कुएं से बाहर निकाल पाए।
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव को स्याहड़वा गांव ले जाया गया। वहां पर गमगीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार किया गया। श्मशान घाट में काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। हर किसी की जुबान पर हादसे की चर्चा थी।