ज्ञानदीप सेवार्थ आश्रम में भजन सत्संग करते हुए गद्दीनशीन महंत राजेश्वरा नंद महाराज।
हिसार। ‘गुरु मेहर करें जब कागा ते हंस बना दें, जब सतगुरु की फिरज्या माया पल में पलट जाय काया, सतगुरु सिर पे कर छाया पल में शिखर चढ़ा दें’, ‘भरा सत्संग का दरिया नहा लो जिसका जी चाहे’ यह भजन महंत राजेश्वरानंद महाराज ने कैमरी रोड स्थित ज्ञानदीप सेवार्थ आश्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे। महंत राजेश्वरानंद महाराज विश्व कल्याण के लिए 11 दिवसीय 21 धूणों के बीच चल रही तपस्या के समापन पर पहुंचे श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर सर्वमंगल कामना हवन किया गया। जिसमें श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति डाली।
इस मौके पर आयोजित सत्संग में महंत राजेश्वरा नंद महाराज ने फरमाया कि गुरु की दया कृपा जिस पर हो जाती है तो उस श्रद्धालु की काया ही पलट जाती है। हमें सदैव गुरु की शरण में रहकर नेकी, भलाई व अच्छाई के कार्य करने चाहिए। अपने इष्ट देवता के अधीन होकर पूजन करें। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर महंत दलबीरा नंद महाराज आंकावाली, सज्जनानंद महाराज, कमल सैनी, महेश गर्ग, सहदेव सदलपुर व सतीश मिलगेट सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।