हिसार। कला अध्यापक बिजेंद्र सिंह को विदेशी मुद्राओं का संग्रह करने का शौक परिवार के भरण पोषण के लिए छोड़ना पड़ा। उनके पास मुगल काल, ब्रिटिश काल की भारतीय मुद्राओं के अलावा करीब 200 देशों की मुद्राओं का संग्रह है। जिसे उन्हाेंने काफी जतन से जुटाया था, लेकिन पारिवारिक दायित्व को निभाने के लिए शहर के जनता मार्केट में खुद अपने संग्रह में रखी मुद्रा बेचने को मजबूर हैं।
बता दें कि अभी हाल ही में उच्चतम न्यायालय के आदेश पर शिक्षा विभाग ने कला अध्यापकों को हटा दिया। ढाणी पीरावाली में तैनात कला अध्यापक बिजेंद्र सिंह का नाम भी हटाए गए शिक्षकों की सूची में है। विभाग द्वारा हटाए जाने से पहले पूर्व उन्होंने करीब 11 साल तक शिक्षा विभाग में नौकरी की है।
मुगल काल तक की मुद्राओं का संग्रह
बिजेंद्र सिंह के पास करीब 200 देशों की मुद्राओं का संग्रह है, जिसमें नोट व सिक्के दोनों शामिल हैं। इसके अलावा उनके पास ब्रिटिश काल, आजादी से पहले देश के अलग-अलग राज्यों की मुद्राएं, मुगल काल की मुद्राएं भी हैं। इस संग्रह को तैयार करने में उन्हें दो साल का समय लग गया।
अपने मुद्रा संग्रह की प्रदर्शनी भी लगा चुके हैं बिजेंद्र
बिजेंद्र सिंह के मुताबिक करीब तीन साल पहले नेपाल घूमने गए थे। इस दौरान उन्होंने पशुपति मंदिर के दर्शन के बाद से वहां की मुद्रा खरीदी थी, तब से उन्हें अलग-अलग देशों की मुद्रा एकत्रित करने का शौक पैदा हो गया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से संपर्क कर अलग-अलग देशों की करेंसी एकत्रित करनी शुरू की। वह अपने संग्रह की स्कूल में प्रदर्शनी भी लगा चुके हैं।
संग्रह में दस लाख डॉलर का नोट
बिजेंद्र सिंह द्वारा लगाई गई स्टॉल पर काफी लोग आ रहे हैं और इन मुद्राओं के बारे में जानकारी लेने के साथ-साथ खरीद भी रहे हैं। खासतौर पर भारतीय मुद्रा, जिसमें एक पैसा, दो पैसा, तीन पैसा, 10 पैसा, 20 पैसा शामिल हैं। उनके संग्रह में जिंबाब्वे का दस लाख डॉलर का नोट भी शामिल है। बिजेंद्र सिंह के अनुसार देश में आए वित्तीय संकट के दौरान वहां की सरकार ने कुछ समय के लिए इस नोट को जारी किया था।