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बिठमड़ा में जातीय तनाव, परिजनों ने नहीं उठाया शव

Mon, 19 Sep 2016 01:19 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हिसार
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हिसार। सिविल अस्पताल में हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते बिठमडा के ग्रामीण। - फोटो : bureau
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बिठमड़ा गांव में वाल्मीकि समुदाय के युवक राजबीर उर्फ डांगी द्वारा शनिवार को खुदकुशी करने के मामले में नया मोड़ आ गया। परिजनों ने जाति विशेष के चार लोगों, उकलाना थाना एसएचओ और एक अन्य पुलिस वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर सिविल अस्पताल से डेड बॉडी उठाने से इनकार कर दिया। उन्होंने एलान करते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने तक वे डेड बॉडी नहीं उठाएंगे। देर शाम तक पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया था और डेड बॉडी नहीं उठाई गई थी। डेड बॉडी शनिवार शाम चार बजे यहां अस्पताल में लाई गई थी।
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दलित समाज के लोग घटना की जानकारी मिलने पर रविवार को सिविल अस्पताल परिसर में पहुंचे और मृतक के परिजनों से बातचीत की। उन्होंने वार्ता के बाद इस मामले में गांव के जाति विशेष के चार लोगों, उकलाना थाना एसएचओ और झगड़े के मामले के जांच अधिकारी को खुदकुशी का जिम्मेवार बताया।

पाबड़ा निवासी विनोद कुमार ने बताया कि उनके बहनोई राजबीर को गांव के ही जाति विशेष के चार लोगों ने पुलिस से मिलीभगत कर खुदकुशी करने पर मजबूर कर दिया। उनके बहनोई पर वे लोग अपने छोटे भाई अशोक को पंचायत में पेश करने का दबाव डाल रहे थे। वे लोग कई बार घर आकर उनकी बेइज्जती कर चुके थे। वे भाई को न पेश करने पर परिवार की बहू-बेटियों को उठा ले जाने की धमकी दे रहे थे और कई बार सरेआम जलील किया। जाति विशेष के लोगों के भारी दबाव से उनके बहनोई ने खुदकुशी कर ली। हमने फैसला किया है कि जिम्मेवार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद ही शव मोर्चरी से उठाएंगे। वार्ता में एडवोकेट रजत कल्सन, वीरेंद्र बागोरिया, गुलाब सिंह और अन्य मौजूद थे।
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पुलिस को दी शिकायत में यह लगाया आरोप
बिठमड़ा के अशोक कुमार ने पुलिस को शिकायत देकर कहा कि गांव के एक व्यक्ति ने 12 सितंबर को उसको जातिसूचक गालियां दी थी, जिससे अशोक की उसके साथ मारपीट हो गई थी और आरोपी ने उसे ईंट मारी थी। परंतु पुलिस ने एक जाति विशेष के दबाव में उल्टा मेरे खिलाफ ही मुकदमा दर्ज किया था। गांव के चार लोगों ने एसएचओ उकलाना और झगड़े के केस के जांच अधिकारी के साथ मिलकर बार-बार उनके घर आकर उसके भाई राजबीर को जातिसूचक शब्द बोलकर भाई को पंचायत में पेश करने का दबाव बना रहे थे। उसने कहा कि शनिवार को बहनोई सोनू की राजबीर से फोन पर बात हुई थी। राजबीर ने बताया था कि शुक्रवार शाम को बिठमड़ा के चार लोग एसएचओ और जांच अधिकारी के साथ उनके घर आए थे और जातिसूचक शब्द कहते हुए मुझे पेश करने के लिए बोला था। आरोप है कि इन लोगों ने उसके भाई को इतना डराया कि उसने फांसी लगाकर जान दे दी।

मिर्चपुर कांड दोहराने की दी धमकी
मृतक के भाई अशोक कुमार ने कहा कि गांव के जाति विशेष के कुछ लोगों ने उनको मिर्चपुर कांड दोहराने की धमकी दी है। इसलिए उनको जान का खतरा बना हुआ है। उनके जान माल की सुरक्षा की जाए। उसने बताया कि हमारे समुदाय के लोग सहमे हुए हैं। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। उसने बताया कि उसने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था और उसकी जमानत मंजूर हो गई है।

मामला अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंचा
एडवोकेट रजत कल्सन ने बताया कि बिठमड़ा के युवक द्वारा खुदकुशी करने के मामले की शिकायत अनुसूचित जाति आयोग तक भेज दी गई है। आयोग ने इस संबंध में अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कल्सन ने बताया कि आरोपी पक्ष कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, वे न्याय मिलने तक चुप नहीं बैठेंगे। उनका संघर्ष जारी रहेगा।

सिटी थाना एसएचओ रहे मौजूद
सिटी थाना प्रभारी मंदीप कुमार सांगवान माहौल तनावपूर्ण होने के चलते सिविल अस्पताल परिसर में पुलिस बल के साथ मौजूद थे। खुदकुशी केस में कार्रवाई उकलाना थाना के एसआई सुंदर लाल ने की। मामला जातीय होने के कारण पुलिस का खुफिया तंत्र भी सक्रिय था। आरोप लगने की वजह से उकलाना थाना प्रभारी अस्पताल में नजर नहीं आए।

लगाए गए आरोप बेबुनियाद : एसएचओ
उकलाना थाना प्रभारी रोहताश कुमार ने बताया कि बिठमड़ा मामले में मुझ पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। मैं युवक के सुसाइड करने की सूचना मिलने पर उनके घर गया था। उससे पहले कभी उनके घर नहीं गया। न दबाव बनाया। मृतक के पिता ने कल स्वयं 100-125 ग्रामीणों की मौजूदगी में बयान देकर कहा था कि बीमारी के चलते उसके बेटे ने खुदकुशी की है। इसमें किसी का कसूर नहीं।
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