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Hisar News: दस संगठनों ने एडीजीपी वाई पूरण कुमार के लिए सड़क पर उतरकर मांगा न्याय

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हिसार में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता  स्वर्गीय  पूर्ण कुमार के दोषियों को गिरफ्तारी को लेकर
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हिसार। एडीजीपी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या मामले में न्याय की मांग के लिए लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को सर्व समाज संगठन की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन में 10 प्रमुख संगठनों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने क्रांतिमान पार्क में जनसभा कर विरोध जताया और उसके बाद लघु सचिवालय तक रोष मार्च निकाला। बुधवार को नगर पालिका कर्मचारी संघ के सदस्य एचएयू गेट नंबर चार से लघु सचिवालय तक रोष मार्च निकालेंगे।
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कांग्रेस और बसपा सहित कई सामाजिक संगठनों के नेताओं ने कहा कि एडीजीपी वाई पूरण कुमार के आत्महत्या के पीछे प्रताड़ना जिम्मेदार है। उन्होंने दोषियों की गिरफ्तारी और अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की। बसपा ने डीजीपी शत्रुजीत कपूर, एसपी नरेंद्र बिजारणिया एवं अन्य नामजद अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी, मुकदमा अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा बीएनएस की धारा 112 के तहत चलाने और मामले की निगरानी उच्चतम न्यायालय या राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से कराने की भी मांग की। इस अवसर पर रोशन लाल, पूर्व पार्षद कुलदीप बाल्मीकि, पूर्व पार्षद मान सिंह चौहान, कैप्टन कृष्ण बगला, इंद्राज सिंह भारती आदि उपस्थित रहे।

इन संगठनों के पदाधिकारियों ने दिया साथ
ओड सभा हरियाणा के राज्य उप प्रधान राजेश मुंडई।
कंबोज सभा हरियाणा के राज्य प्रधान देसराज कंबोज।
आदि धर्म सभा हिसार के प्रधान मुकेश कुमार।
दलित अधिकार मंच हिसार के प्रधान कामरेड चंदगी राम।
आंबेडकर सभा हिसार के पूर्व प्रधान विजेंद्र सिंह सभरवाल।
यूनिवर्सिटी कर्मचारी यूनियन हिसार के पूर्व प्रधान अशोक अठवाल।
जनवादी महिला समिति की जिला प्रधान शकुंतला जाखड़।
विकलांग अधिकार मंच हरियाणा के राज्य महासचिव ऋषिकेश राजली।
रिटायर्ड पुलिस एसोसिएशन जिला प्रधान ओमप्रकाश।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ग्रामीण बृजलाल बहबलपुरिया।
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सीबीआई से जांच होनी चाहिए: सुभाष वर्मा
कांग्रेस ओबीसी सेल के पूर्व उपाध्यक्ष सुभाष वर्मा ने कहा कि आईपीएस वाई पूरण कुमार के मामले में न्यायिक जज अथवा सीबीआई की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सात दिनों से पोस्टमार्टम नहीं हुआ है और परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं। जिन अधिकारियों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं, उनके खिलाफ जल्द कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने हरियाणा सरकार की नाकामी बताते हुए कहा कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई।
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