फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिक्षकों की मुहिम लाई रंग, अभिभावकों ने प्राइवेट स्कूल की जगह सरकारी स्कूल में कराया दाखिला

विज्ञापन
विज्ञापन
आमतौर पर हर अभिभावक का सपना होता है कि उसका बच्चा किसी अच्छे इंग्लिश मीडियम प्राइवेट स्कूल में पढ़े। मगर जिले के गांव चूली बागड़ियान में अभिभावकों की सोच इसके उलट है। उनका सपना है कि उनका बच्चा गांव के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़े। अभिभावकों की इस सोच में आए बदलाव के पीछे इस स्कूल के स्टाफ व सरपंच का बड़ा योगदान है। आज से तीन साल पहले स्कूल के स्टाफ ने गांव के घर-घर-घर घूमकर अभिभावकों से उनके बच्चों का दाखिला प्राइवेट स्कूल की बजाय सरकारी स्कूल में कराने की अपील की। अभिभावकों द्वारा गिनवाई गईं कमियों को दूर किया। स्कूल में इंग्लिश मीडियम की पढ़ाई शुरू करवाने के लिए अपने खर्च ने दो टीचर रखे। स्कूल वैन की भी व्यवस्था की। यही नहीं अभिभावकों का विश्वास जीतने के लिए सरपंच ने सबसे पहले अपने बच्चों का सरकारी स्कूल में दाखिला कराया। आज स्थिति यह है कि अभिभावक अपने बच्चों का प्राइवेट स्कूल की बजाय इस स्कूल में दाखिला कर रहे हैं।
विज्ञापन

यूं शुरू हुई मुहिम
शिक्षक सुभाष चंद्र के मुताबिक मैं वर्ष 2017 में ट्रांसफर होकर इस स्कूल में आया था। उस समय स्कूल का पुराना पूरा स्टाफ बदल गया। उस समय स्कूल में बच्चों की संख्या भी ज्यादा नहीं थी। ग्रामीण लड़कियों को इस स्कूल में नहीं भेजते थे। गांव के काफी बच्चे प्राइवेट स्कूलों में ही जाते थे। तब स्टाफ सदस्यों ने मिलकर स्कूल में छात्र संख्या बढ़ाने की सोची, जिसमें उन्हें स्कूल के तत्कालीन प्रिंसिपल कृष्ण वर्मा व सरपंच प्रतिनिधि दुर्गेश का काफी सहयोग मिला।
ये आई परेशानी
शिक्षक के अनुसार जब हम अभिभावकों के पास गए तो उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे तो इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ते हैं और उनके स्कूल ले जाने व घर छोड़ने के लिए वैन आती है। सबसे पहले प्राइमरी तक की कक्षाओं को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाने के लिए दो शिक्षिकाएं रखीं, जो अनुभवी थीं। शुरुआत में स्टाफ सदस्यों ने अपने वेतन से इन शिक्षिकाओं को वेतन दिया। बाद में जो अभिभावक अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाना चाहते थे, उनके द्वारा इन शिक्षिकाओं को वेतन दिया जाने लगा। सरपंच की तरफ से दो वैन की व्यवस्था की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्कूल में बच्चों की स्थिति
कक्षा-वर्ष 2017-वर्ष 2020
पहली से पांचवीं-52-135
छठी से आठवीं-43-75
नौवीं से बारहवीं-80-120
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें