हिसार। अनियमित दिनचर्या और शारीरिक श्रम की कमी से शुगर (मधुमेह) बढ़ रहा है। तनाव भी इसका बड़ा कारण है। 30 से अधिक आयु के लोगों को इसका खतरा ज्यादा रहता है। मधुमेह पीड़ित व्यक्ति को अन्य रोग भी सताने लगते हैं। इससे बचने के लिए लोगों को रोज पैदल घूमने, साइकिल चलाने, व्यायाम करने, नियमित दिनचर्या की सलाह दी जाती है।
यह अंधेपन, गुर्दे की विफलता, दिल के दौरे और स्ट्रोक का एक प्रमुख कारण है। चिकित्सकों के मुताबिक मधुमेह तीन प्रकार का होता है। पहला साध्य, दूसरा नियंत्रित और तीसरा असाध्य होता है। पहले 30 साल से अधिक उम्र के लोगों को मधुमेह होता था लेकिन अब 15 से 25 साल तक के मरीजों में भी मधुमेह के लक्षण मिल रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में रोज करीब 200 रोगी मधुमेह का उपचार करवाने आ रहे हैं। इनमें से अधिकतर मरीज 30 साल से अधिक उम्र के होते हैं।
जिला अस्पताल के डॉ. अजय चुघ ने बताया कि मधुमेह से उत्पन्न स्वास्थ्य और आर्थिक खतरे के बारे में चिंता बढ़ना वाजिब है। इसे रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय मधुमेह महासंघ (आईडीएफ) की पहल पर मधुमेह दिवस मनाया जाता है।
मधुमेह के लक्षण
मधुमेह के सामान्य लक्षणों में बहुत प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक थकान, धुंधला दिखना और घावों का देर से ठीक होना शामिल है। ज्यादा भूख लगना, बिना किसी कारण वजन कम होना और हाथों या पैरों में झुनझुनी या सुन्नता भी इसके अन्य लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों में लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं या धीरे-धीरे विकसित हो सकते हैं।
आयुर्वेद से मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है। पीड़ितों को नियमित दिनचर्या अपनाकर योगासन, प्राणायाम, पंचकर्म आदि गतिविधियों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। शुद्ध, ताजा, सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।
- डॉ. सुखवीर वर्मा, आयुर्वेद विशेषज्ञ, जिला अस्पताल।