नारनौंद । खुशी कॉलेज ऑफ नर्सिंग, कागसर में छात्राओं के साथ कथित अनियमितताओं और उत्पीड़न का मामला फिर गरमा गया है। शुक्रवार को छात्राओं ने कॉलेज के मुख्य गेट पर धरना शुरू कर दिया। छात्राओं का आरोप है कि शिकायतें प्रदेश सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। देर रात तक कड़ाके की ठंड में छात्राएं धरने पर डटी रहीं।
धरने पर बैठीं छात्राओं ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन लगातार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रहा है। छात्राओं की मुख्य मांग कॉलेज संचालक जगदीश की गिरफ्तारी और सभी छात्राओं का किसी अन्य मान्यता प्राप्त नर्सिंग कॉलेज में माइग्रेशन कराने की है। छात्राओं का कहना है कि वे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, स्वास्थ्य मंत्री आरती राव, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दे चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस बने हैं।
...तो प्रधानमंत्री को खून से लिखेंगी पत्र :
छात्राओं ने प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो कॉलेज में ताला जड़ दिया जाएगा। इसके बाद भी समाधान नहीं हुआ तो वे चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर धरना देंगी। छात्राओं ने यह भी कहा कि मजबूरी में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से पत्र लिखकर भेजने का कदम उठाएंगी।
कॉलेज की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए :
धरने के दौरान छात्राओं ने कॉलेज की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि नर्सिंग कोर्स के लिए अनिवार्य अस्पताल ड्यूटी आज तक नहीं लगवाई गई जबकि यही इस पाठ्यक्रम की सबसे अहम शर्त है। इस मुद्दे पर सवाल उठाने पर कॉलेज प्रबंधन की ओर से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। छात्राओं का दावा है कि लगभग 300 छात्राओं पर मात्र दो अध्यापिकाएं तैनात हैं जिससे पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
खराब भोजन और सुरक्षा का मुद्दा उठाया
छात्राओं ने भोजन में कीड़े मिलने, बार-बार बिजली कटौती, चिकित्सा सुविधा के अभाव और महिला सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होने जैसे आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि जो छात्राएं आवाज उठाती हैं, उन्हें निशाना बनाकर एडमिशन रद्द करने, डिग्री रोकने और मूल दस्तावेज न देने की धमकियां दी जाती हैं। परिजनों को भी उनके खिलाफ भ्रामक जानकारी दी जाती है। कॉलेज की मान्यता पर भी उन्हें गुमराह किया गया और निरीक्षण के दौरान केवल दिखावटी व्यवस्थाएं की जाती हैं। देर शाम तक छात्राएं धरने पर डटी रहीं।