हिसार। आखिरकार 10 साल बाद वीरवार से शहर में आवारा कुत्तों का बधियाकरण व टीकाकरण का काम शुरू हो गया। एजेंसी के कर्मियों ने पहले दिन 5 कुत्ते पकड़े और पिंजरे वाली गाड़ी में डालकर घोड़ा फार्म के पास स्थित नगर निगम के स्लॉटर हाउस पहुंचाया। नगर निगम की तरफ से एजेंसी को 6 माह में 5 हजार कुत्तों के बधियाकरण व टीकाकरण का लक्ष्य दिया गया है।
मेयर प्रवीण पोपली की मौजूदगी में वार्ड 9 के आनंद निकेतन से अभियान की शुरुआत की गई। नगर निगम के मुताबिक इससे पहले वर्ष 2015 में नेशनल रैबीज कंट्रोल अभियान के तहत शहर में आवारा कुत्तों के बधियाकरण का अभियान चलाया गया था। इस दौरान 10 हजार से ज्यादा व जिले में 39 हजार कुत्तों का बधियाकरण व टीकाकरण किया गका। यह अभियान वर्ष 2016 तक चला था। अब जिस एजेंसी को टेंडर दिया गया है, उसे एक कुत्ते के लिए 1400 रुपये का भुगतान किया जाएगा।
हर दिन 30 से 40 कुत्तों का पकड़ा जाएगा
ठेका लेने वाली संतुलन जीव कल्याण एजेंसी के प्रोजेक्ट हैड डॉ. प्रवेश जाखड़ ने बताया कि शहर से प्रतिदिन 30 से 40 कुत्तों को पकड़ा जाएगा। इसके अगले दिन स्लॉटर हाउस में बधियाकरण व टीकाकरण किया जाएगा। फिर 4 से 5 दिन निगरानी में रखकर वापस उसी एरिया में छोड़ा जाएगा जहां से पकड़ा गया था। दो पशु चिकित्सक बधियाकरण व टीकाकरण का काम करेंगे। कुत्तों को छोड़ने से पहले पहचान के लिए उनके कान पर वी शेप का निशान बनाया जाएगा। डॉ. जाखड़ के मुताबिक बधियाकरण के दो माह में कुत्तों के व्यवहार में बदलाव आएगा। आक्रामकता और काटने की प्रवृत्ति कम होगी।
शहर में 25 हजार आवारा कुत्ते होने का अनुमान
नगर निगम के मुताबिक शहर के कुत्तों की आबादी का सटीक आंकड़ा नहीं है। एनीमल वेलफेयर बोर्ड मानता है कि किसी शहर में आवारा कुत्ते उस शहर की आबादी का लगभग 5 प्रतिशत होते हैं। हिसार शहर की जनसंख्या करीब 5 लाख है। इस हिसाब से शहर में करीब 25 हजार आवारा कुत्ते होने का अनुमान है।
तीन साल में सिरे चढ़ पाया टेंडर
वर्ष 2022 की मई में नगर निगम ने पहली बार कुत्तों के बधियाकरण-टीकाकरण का टेंडर लगाया था। निर्धारित संख्या से कम एजेंसियों के आने के कारण टेंडर सिरे नहीं चढ़ सका। इसके बाद दूसरी बार टेंडर लगाया। मगर इस बार भी रद्द करना पड़ा। इसके बाद लगातार 8 बार टेंडर लगाकर एजेंसियों से आवेदन मांगे गए लेकिन हर बार एक ही शर्त बाधा बनती रही। शर्त के अनुसार टेंडर उसी एजेंसी को अलॉट किया जाएगा, जो पशु कल्याण बोर्ड से पंजीकृत हो या फिर उसके पास बोर्ड की एनओसी हो। नगर निगम को ऐसी कोई एजेंसी नहीं मिली जो इस शर्त को पूरा करती हो। आखिरकार 9वीं बार वह एजेंसी मिली जो इस शर्त को पूरा करती थी। इसे नवंबर 2024 में टेंडर अलॉट कर दिया गया।
बंदर हो गए समझदार, नहीं आ रहे पकड़ में
अभियान के शुभारंभ पर मेयर प्रवीण पोपली ने बंदर पकड़ने के अभियान पर कहा कि बंदर समझदार प्राणी है। उन्हें पकड़ने के लिए पिंजर लगाया जाता है लेकिन वह उसमें घुसते नहीं। नियम इतने सख्त हैं कि ठेकेदार उन्हें पकड़ने के लिए अन्य कोई हथकंडा नहीं अपना सकता है। गायों को खुले में छोड़ने वाले पशुपालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के आदेश पर मेयर ने कहा कि निगम प्रशासन पहले से ही पशुपालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा रहा है। अतिरिक्त निगम आयुक्त डॉ. प्रदीप हुड्डा, सीएसआई राजकुमार, एएसआई कपिल, पार्षद शीला देवी, पार्षद मनोहर लाल, पार्षद संजय डालमिया, आदि मौजूद रहे।