फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खेल विभाग का कारनामा : 2 लाख की जगह थमाए 20 हजार रुपये

Wed, 19 Aug 2015 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार/अमित भारद्वाज
विज्ञापन
विज्ञापन
एक जीरो कितना महत्वपूर्ण होता है। इसकी अहमियत का अगर पता लगाना है, तो अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी रविता से पूछिए। कुश्ती खिलाड़ी रविता को उसकी खेल उपलब्धियों के लिए विभाग की तरफ से दो लाख रुपये का पुरस्कार मिलना था। मगर एक जीरो कम होने से उसे सिर्फ 20 हजार रुपये ही मिले।
विज्ञापन


हालांकि अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि उसकी बकाया पुरस्कार राशि उसे जल्द ही मिल जाएगी। मगर एक साल बीतने के बाद भी उसे यह राशि नहीं मिल पाई है।

इन उपलब्धियों के लिए मिला था पुरस्कार
रविता ने वर्ष 2012 में एशियन कैडेट व वर्ल्ड कैडेट दोनों ही चैंपियनशिप में कांस्य पदक प्राप्त किया था। इन उपलब्धियों के चलते उसे विभाग की तरफ से 2 लाख रुपये का कैश अवॉर्ड मिलना था।

इसके अलावा रविता ने वर्ष 2011 व 2012 में नेशनल कैडेट में स्वर्ण और वर्ष 2013 में नेशनल जूनियर में स्वर्ण पदक जीता था। रविता ने इसी वर्ष नेशनल जूनियर में रजत पदक भी प्राप्त किया है।
विज्ञापन


चोट से उबरकर जीता पदक
वर्ष 2013 में नेशनल चैंपियनशिप के दौरान रविता के घुटने में चोट लग गई थी। चिकित्सक ने उसे लिगामेंट्स बदलवाने की सलाह दी।

इस ऑपरेशन पर 2.50 लाख रुपये खर्च आना था। मगर रविता इतना खर्च नहीं उठा सकती थी। फिर उस समय कमिश्नर रहे युद्धवीर सिंह ख्यालिया ने रविता के ऑपरेशन का खर्च वहन किया था।

इस ऑपरेशन के बाद रविता ने इसी वर्ष से फिर से खेलना शुरू किया और नेशनल जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किया।

माली हालत नहीं है ठीक
रविता के परिवार की आर्थिक हालत बढ़िया नहीं है। रविता के पिता नहीं है। इस कारण से उसकी मां ही घर का सारा खर्च उठाती है। रविता की मां सिलाई करके पूरे घर का खर्च चलाती है।

रविता की दो बहनें और एक भाई भी हैं। रविता खेलने के साथ-साथ पढ़ाई भी कर रही है। वह फिलहाल बीए फर्स्ट ईयर में है।

रविता अलटियस स्पोर्ट्स एकेडमी में कोचिंग ले रही है। कोच उषा शर्मा के मुताबिक वह किसी भी खिलाड़ी से कोचिंग के पैसे नहीं लेती, बल्कि उन्हें नि:शुल्क ट्रेनिंग देती हैं।

उस समय गलती की वजह से रविता को दो लाख की बजाए 20 हजार रुपये ही मिले। मैंने इस बारे में विभाग को एक पत्र भी लिखा था। अब मौजूदा डीएसओ को फिर से पत्र लिखकर उन्हें रिमाइंड कराना चाहिए।
विज्ञापन

- दर्शन कुमार मिढ्ढा, पूर्व जिला खेल अधिकारी

मामला मेरी जानकारी में है। रविता को उसकी बकाया पुरस्कार राशि मिल जाएगी।
- सतबीर सिवाच, जिला खेल अधिकारी, हिसार
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें