शरद पवार वाली एनसीपी छोड़ने वाली बात को अफवाह बताने वाली सोनिया दूहन ने शाम तक एनसीपी को अलविदा कह दिया और जल्द ही वह कांग्रेस में शामिल होंगी। दूहन ने एनसीपी छोड़ने की वजह सुप्रिया सुले का काम करने का तरीका न पसंद आना बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव में न तो उनको किसी सभा में बुलाया गया।
हिसार के गांव पेटवाड़ की सोनिया दूहन ने एनसीपी के सभी पदों से त्यागपत्र देते हुए पार्टी को अलविदा कह दिया है। सोनिया दूहन जल्द ही कांग्रेस ज्वाइन करेंगी। बता दें कि बुधवार को सुबह से ही सोनिया दूहन के एनसीपी शरद पवार पार्टी को छोड़कर कांग्रेस में जाने के मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे। बुधवार को इसे लेकर नारनौंद विधानसभा क्षेत्र में पूरे दिन यह मामला चर्चा का विषय बना रहा।
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दिन में सोनिया ने सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज को गलत बताया था, लेकिन शाम तक उन्होंने एनसीपी छोड़ दी और जल्द ही वह कांग्रेस में शामिल होंगी। बता दें कि मंगलवार को एनसीपी (एसपी) की छात्रसंघ अध्यक्ष के पद से सोनिया दूहन ने इस्तीफा दे दिया था। दूहन ने एनसीपी छोड़ने की वजह सुप्रिया सुले का काम करने का तरीका न पसंद आना बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव में न तो उनको किसी सभा में बुलाया गया और न ही चुनाव में उनको किसी तरह की कोई जिम्मेदारी दी गई। सुप्रिया सुले ने उनको महाराष्ट्र में बैन करवा दिया, जबकि वह एनसीपी से एक दशक से जुड़ी हुई हैं। सोनिया दुहन पुणे में पायलट की ट्रेनिंग ले रही थीं।
सोनिया ने गुरुग्राम के होटल से विधायकों को छुड़वाया था
सोनिया दूहन उस समय चर्चा में आई थी जब 2019 में उन्होंने गुरुग्राम के ओबरॉय होटल से एनसीपी के चार विधायकों को बाहर निकाला था। ये विधायक अजित पवार की बगावत के बाद बीजेपी के साथ जाने की तैयारी में थे। चार विधायकों दौलत दरोदा, नरहरि जिरवाल, नितिन पवार और अनिल पाटिल थे। हरियाणा सरकार इन विधायकों पर नजर रख रही थी इसके बावजूद सोनिया दूहन अपने विधायकों को वहां से ले जाने में कामयाब रहीं थीं।
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सोशल मीडिया पर दो महीने से असक्रिय हैं सोनिया दूहन
सोनिया दूहन ने कहा कि चुनाव के समय में वह सोशल मीडिया पर दो महीने से अन एक्टिव हैं। उनको एक भी बार किसी मीटिंग व सभा में बुलाया नहीं गया। इसकी सारी जानकारी शरद पवार के सामने रखी थी। शरद पवार ने इस सब चीजों को समझा भी था और चर्चा करने की बात कही थी। मगर चर्चा हो पाती इससे ही ऐसी चीजें हो गई जिससे उनको छात्र संघ अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा।