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पराली जलने से नष्ट हो जाते हैं मिट्टी के पोषक तत्व

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मंडी आदमपुर। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के गांव सदलपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में धान की पराली प्रबंधन पर एक दिवसीय जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि पराली जलाने पर वायु प्रदूषण के अलावा मिट्टी के पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं।
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केविके के कॉर्डिनेटर डॉ. नरेंद्र ने कहा कि धुएं से पर्यावरण में जहरीली गैस घुल जाती है जो स्मॉग यानी धुएं वाली धुंध का कारण बनती है। यह लोगों की श्वसन संबंधी परेशानियों का कारण भी है। इसके अलावा आग फैलने व अन्य खेतों या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की संभावना भी बनी रहती है। मिट्टी में मौजूद फायदेमंद जीवाणु व केंचुएं भी मर जाते हैं जिससे मिट्टी में प्राकृतिक तौर से नाइट्रोजन व हवा नहीं पहुंच पाती। धुएं के कारण फैली धुंध एक ओर जहां कई दुर्घटनाओं का कारण बनती है वहीं बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए सांस लेने में तकलीफ का कारण बनती है।
कार्यक्रम में पराली के समुचित प्रबंधन के लिए स्ट्रा रीपर, हैप्पी सीडर, जीरो ड्रिल मशीन, मल्चर व चॉपर मशीन इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ डॉ. अजीत, डॉ. कुलदीप, एडीओ डॉ. सुरेंद्र ने अन्य सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
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